भारत की शादियों की ये हैं कुछ अनोखी रस्में, इस जगह टमाटर फेंक के करते हैं दूल्हे का स्वागत

भारत में शादियां किसी त्यौहार से कम नही होती। शादी के बंधन में बंधने वाले दो लोगों के बीच ऐसी रस्में और रीति रिवाज होते हैं कि एक दूसरे को कुछ कहे बिना ही वह एक दूसरे को समझने लगते हैं। रीति रिवाज एक दूसरे से जोड़ने का और एक दूसरे को समझने का काम करते हैं। यह रीति रिवाज अपने आप में मस्ती के साथ साथ एक संदेश भी छिपाएं रखते हैं। दूल्हा दुल्हन के लिए हर रस्म उनके आने वाले जीवन की परीक्षा में उनके खरे उतरने का एक जरिया होती है। हालांकि भारत में आपको एक से बढ़कर एक रस्में देखने को मिल जाती हैं जो लगती तो मजेदार हैं, लेकिन असल में उनके पीछे संदेश होता है।

दूल्हे का स्वागत

आम तौर पर हमारे यहां दूल्हे का स्वागत बहुत ही भव्य तरीके से होता है। नाचते गाते आने वाले बाराती जब दूल्हे को घोड़ी या कार से उतारंते हैं तो लड़की वाले फूलों की माला से दूल्हे का स्वागत करते हैं। वहीं यूपी का एक छोटा सा समुदाय सरसौल अपने यहां दूल्हे का स्वागत आलू टमाटर फेंक कर करते हैं। दरअसल इनका मानना है कि अगर किसी चीज की शुरुआत बुरी हो तो अंत बहुत अच्छा होता है। दूल्हा दुल्हन की जोड़ी बनी रहे और उनके जीवन में खुशियां बनी रहे इसके लिए टमाटर और आलू फेंककर उनका स्वागत किया जाता है।

पेड़ से विवाह

हमारे देश के कुछ अनोखे रिवाज हैं जो आपको सिर्फ और सिर्फ भारत में देखने को मिलते हैं। हमारे देश में मंगल शनि, ज्योतिष और कुंडली बहुत मानी जाती है। ऐसा मानते हैं कि मंगल और शनि के एक निश्चित संयोजन के तहत जो पैदा होता है वह मांगलिक कहलाता है। अगर किसी की कुंडली में मंगल का दोष हो तो उसकी शादी मंगल दोष वाले व्यक्ति के साथ ही की जाती है। अगर किसी  नॉन मांगलिक व्यक्ति के साथ विवाह करना हो तो पहले पीपल के पेड़ से उसका विवाह करना होता है। ऐसे में पहला पति या पत्नी वह पेड़ बनता है और फिर कोई और।

बैलेंस दिखाना

परिवार शुरु करना और चलाना बड़ी बात होती है।  शादी होने का मतलब .यह नही है कि आप सिर्फ एक दूसरे के साथ बच्चे पैदा करें औऱ रहें। आपके अंदर इस शादी को अच्छे से निभाने की और बच्चों की संभालने की जिम्मेदारी है या नहीं यह जानना भी जरुरी होता है।बिहार में कुछ समुदायो में ऐसी ही एक प्रथा है। इसमें दुल्हन जब बड़ों का आशीर्वाद ले रही होती है तो उसे सिर पर मिट्टी का पॉट को बैलेंस करना होता है। इसका मतलब होता है कि वह अपने आने वाले जीवन में ऐसे ही बैलेंस बनाकर चलेगी।

दुल्हन छिपाना

अगर आपको शादी की जल्दबाजी हो और यह जानना चाहते हों कि आपकी दुल्हन कैसी है तो उत्तर पूर्वी भाग के आदिवासी समुदाय के लोगों के दिल की तड़प आप बखुबी समझ पाएंगे। वैसे ऐसा बहुत कम होता है, लेकिन वहां पर कुछ आदिवासी समुदाय शादी के बाद साल भर तक दूल्हा औऱ दुल्हन को एक साल तक मिलने नहीं देते हैं। एक साल के बाद ही वह एक दूसरे से मिलते हैं और फिर बातचीज होती है।

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