राजनीति

विवाद के बीच यह महिला करने जा रही है सबरीमाला में एंट्री, सीएम को लिखी चिट्ठी

केरल का प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर अभी भी महिलाओं के प्रवेश को लेकर चर्चा में बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी महिलाओं को सबरीमाला में एंट्री नहीं मिल पाई हैं। महिलाओं की एंट्री पर चल रहे विवाद के बीच महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने एलान किया है कि वह 17 नंवबर तो मंदिर में प्रवेश के लिए जाएगी। उन्होंने केरल के सीए पिनराई विजयन को चिट्ठी लेकर सुरक्षा भी मांगी है। बता दें कि कोर्ट के आदेश के बाद भी महिलाओं को एंट्रीं नहीं मिली थी और उनका घोर विरोध हो रहा था।

सीएम ने बुलाई बैठक

तृप्ति देसाई ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश को लेकर धमकियां भी मिल रही हैं। अब उन्होंने मंदिर में प्रवेश का मन बना लिया है औऱ इसलिए ही उन्होंने सुरक्षा की मांग की है। वहीं सीएम विजयन ने इस मामले को लेकर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं और इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक याचिका के बाद मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर लगे बैन को हटा दिया था। इसके बाद से महिलाओं का विरोध होने लगा। दूसरी तरफ कोर्ट ने महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई हैं।

कोर्ट ने हटा दिया था बैन

दरअसल कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की उम्र की महिलाओं पर लगे एंट्री बैन को हटा दिया था। 28 सिंतबर को उस वक्त के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सभी आयु की महिलाओं के लिए मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी। कोर्ट के इस फैसले पर जहां महिलाओं को खुशी हुई थी वहीं मंदिर के पुजारियों का कहना था इस आदेश से उन्हें निराशा हुई है। यहां तक की मंदिर के आस पास कई महिलाओं ने भी महिलाओं के प्रवेश नहीं करने दिया था।

इसके साथ ही पीठ ने यह भी कहा था कि 28 सिंतबर के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं लगेगी। दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 4-1 के बहुमत से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लैंगिक पक्षपात करार देते हुए बैन हटा दिया था।कोर्ट का कहना था कि महिलाओं की मंदिर में प्रवेश पर पांबंदी असंवैधानिक और भेदभाव पूर्ण है।इसके बाद भी महिलाओं को एंट्री नहीं मिली।

कोर्ट ने कहा

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाल पीठ के सामने एक वकील ने कोर्ट के 28 सिंतबर के फैसले पर रोक लगाने की अपील की थी। इस पर पीठ ने कहा था कि 22 जनवरी को ही संविधान पीठ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। साथ ही पीठ ने यह भी कहा है कि  28 सिंतबर को दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी।

कोर्ट ने साफ कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसलों को खारिज करना नहीं हैं। पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी।

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