जानें कुमकुमादि तेल के उपयोग से होने वाले लाभ,औषधीय गुण और दुष्प्रभाव

सुंदर दिखना हर किसी का सपना होता है। आज के समय में शायद ही कोई ऐसा हो जो सुंदर ना दिखना चाहता हो, और सुंदर बनने के लिए लोग ना जाने क्या-क्या नहीं करते। यदि आप सुंदर दिखते हैं तो खुद में एक कांफिडेंस आता है। इसी सुंदरता को पाने के लिए और उसे हमेशा बनाए रखने के लिए आर्यवेद ने कुमकुमादि तेल (कुंकुमादि तैलम) के रूप में एक ऐसा तोहफा है जिसके उपयोग से आपके चेहरे की चमक ,रंगत बरकरार रहती है, यह तेल पूरी तरह से आर्युवेदिक है इसमें मिली औषधियां त्वचा के लिए बहुत ही लाभप्रद हैं।

कुमकुमादि तेल (कुंकुमादि तैलम) त्वचा की चमक तो बढ़ाता ही है साथ ही साथ इसके उपयोग से काले धब्बे, काले घेरे, निशान, और हाइपरपिगमेंटेशन जैसी चेहरे पर होने वाली अन्य समस्याओं से भी निजात दिलाता है। हाइपरपिगमेंटेशन के लिए यह तेल काफी लाभदायी होता है। पूरी तरह से औषधियों से मिलकर बना ये तेल किसी भी कॉस्मेटिक क्रीम की तुलना में अधिक फायदेमंद है, साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नही हैं। कुंकुमादि तेल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-ह्यपरपिगमेंटशन, मॉइस्चराइजर, डेमल्सेण्ट, एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-प्रुरितिक, नेचुरल सनस्क्रीन गुण होते हैं।

कुमकुमादी तेल
कुंकुमादि तैलम

इन औषधियों से मिलकर बना है कुमकुमादि तैलम

कुमकुमादि तेल पूरी तरह से आर्युवेदिक है।

लाल चंदन 48 ग्राम
लाख (लाक्षा) 48 ग्राम
मंजिष्ठा 48 ग्राम
यष्टिमधु (मुलेठी) 48 ग्राम
दारुहल्दी 48 ग्राम
उशीर 48 ग्राम
पद्मक 48 ग्राम
नील कमल 48 ग्राम
बरगद (वट वृक्ष) 48 ग्राम
पाकड़ 48 ग्राम
कमल केसर 48 ग्राम
बिल्व 48 ग्राम
अग्निमंथ 48 ग्राम
श्योनाक 48 ग्राम
गंभारी 48 ग्राम
पाटला 48 ग्राम
शालपर्णी 48 ग्राम
पृश्नपर्णी 48 ग्राम
गोखरू (गोक्षुर) 48 ग्राम
बृहती 48 ग्राम
कंटकारी या भटकटैया 48 ग्राम

ऊपर दी गई सभी जड़ी बूटियों का पाउडर बना लें, पाउडर को कुछ घंटों के लिए 9.126 लीटर पानी में भिगो दें। इसके बाद जड़ीबूटी मिले इस पानी को तब तक उबालें जब तक ये पूरे घोल का एक इसका चौथाई ना हो जाए। इसके बाद इसको छान लें।

कल्क द्रव्य (पेस्ट बनाने के लिए जड़ी बूटी):

मंजिष्ठा 12 ग्राम
यष्टिमधु (मुलेठी) 12 ग्राम
महुआ 12 ग्राम
लाख 12 ग्राम
पतंग 12 ग्राम

उपरोक्त जड़ी बूटियों का पाउडर बना लें फिर उनकों पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें।

आधार तेल:

तिल का तेल 192 मिलीमीटर

अन्य द्रव्य:

बकरी का दूध 384 मिलीलीटर

ऊपर बनाए गए सभी पेस्ट को तिल के तेल और बकरी के दूध में मिलाकर उबालें। इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक उसमें सिर्फ तेल शेष ना रह जाए।

केसर 48 ग्राम
गुलाब जल यथेष्ट मात्रा

केसर और गुलाब जल को मिलाकर इसका पेस्ट बना लें।

केसर को पेस्ट को बनाए गए तेल में मिलाकर कांच की बोतल में भर लें।

आपका  कुमकुमादि तेल बनकर तैयार है।

कुमकुमादी तेल
कुमकुमादि तेल

कुमकुमादि तेल लगाने के फायदे (औषधीय गुण)

  • कुमकुमादि तेल लगाने निम्नलिखित फायदे होते हैं

कुमकुमादि तेल में पाए जाने वाले औषधीय गुण त्वचा में होने वाली समस्याओं के लिए काफी लाभदायी होती हैं, इसका उपयोग त्वचा में होने वाली समस्याओं जैसे पिगमेंटेशन, काले घेरे, मुंहासे, झुर्रियों और धब्बों के लिए इस तेल का उपयोग  लाभदायी होता है।

कुमकुमादि तेल हाइपरपिगमेंटेशन के लिए फायदेमंद

कुमकुमादि तेल में पाई जाने वाली औषधियां त्वचा में चमक लाता है और पिगमेंटेशन को कम करता है।

सनस्क्रीम के रूप में कुमकुमादि तेल का उपयोग

कुमकुमादि तेल एक बेहतर सनस्क्रीम भी है, इस तेल में उपस्थित केसर पराग का होना एक प्राकृतिक सन्सक्रीम का काम करता है, चूंकि इस औषधी का आधार तेल होता है जो त्वचा पर मॉइस्चराइड़र के प्रभाव को बढ़ा देता है। एक रिसर्च के मुताबिक केसर पराग पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करता है जिससे त्वचा सूरज कि किरणों से बचती है।

मुंहासों की रोकथाम में कुमकुमादि तेल

कुमकुमादि तेल में पाए जाने वाले तत्व एंटीऑक्सिडेंट, जीवाणुरोधी और दाहक विरोधी होते हैं, जो मुहांसों को रोकने के लिए काफी लाभदायी होते हैं। इसके साथ ही इस तेल में कुछ ऐसी औषधियां होती है जो चेहरे को स्वच्छ रखती हैं, जो मुहांसो को रोकने में मदद करती हैं। यदि इस तेल का नियमित इस्तेमाल कर के चेहरे की मालिश करते हैं तो इससे त्वचा की मृत कोशिकाएं निकल जाती हैं।

निशानों को कम करने में कुमकुमादि तेल का उपयोग

कुमकुमादि तेल निशानों को हल्का करने में भी काफी लाभदायी होता है, साथ ही यह त्वचा की रंगत को भी हल्का करता है और निखारता है। इसका उपयोग आमतौर पर चेहरे पर पड़े मुहांसे को दागों को कम करने के लिए किया जाता है। तेल में मिले औषधीय गुण त्वचा की सूजन को कम कर देता है। जिस वजह से मुंहासों के निशान नहीं पड़ते हैं और अगर निशान पहले से हैं तो तेल के इस्तेमाल से इसे कम किया जा सकता है। बता दें कि मुहांसो के दाग के अलावा इसका उपयोग चोट के निशानों को हटाने के लिए भी किया जा सकता है।

धब्बों के उपचार में कुमकुमादि तेल का उपयोग

कुमकुमादि तेल में पाई जाने वाली औषधियां त्वचा को मलिनकिरण से बचाता है, साथ ही हार्मोनल असंतुलन, धूप, खाने की बुरी आदतों, बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर आने वाली समस्याओं का समाधान करती हैं साथ ही त्वचा के रंग को भी निखारती है।

त्वचा की चमक को बढ़ाने में कुमकुमादि तेल का उपयोग

त्वचा की रंगत बढ़ाने में भी यह तेल अत्यंत लाभकारी है इस बात को तो आप जानते हैं लेकिन यदि इस तेल को बराबर मात्रा में बादाम तेल के साथ मिलाकर लगाया जाए तो इससे चेहरे की चमक बढ़ाने का तत्तकाल प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव को देखने के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से करें।

कुमकुमादि तेल के साथ नस्य

कुमकुमादि तेल के साथ नासिक प्रशासन भी किया जाता है, इसके बेहतर परिणाम के लिए तेल की कुछ बूंदों को नाक में डालें। इसके नियमित उपयोग से हाइपरपिगमेंटेशन, धब्बों , काले निशानो और झुर्रियों जैसी समस्याओं से आराम दिलाती हैं। यह आंखो के नीचे होने वाले डार्क सर्किल और सफेद हो रहे बालों के लिए भी काफी लाभदायी है।

कुंकुमादि तेल के अन्य फायदे

कुंकुमादि तेल में हल्दी और चंदन होता है जो त्वचा की टोन को हल्का करने में मदद करते हैं। यह त्वचा की समस्या से छुटकारा दिलाने के साथ साथ आंखों के नीचे त्वचा को साफ करने में मदद करता है। केसर तेल त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है। यह चेहरे की मांसपेशियों को नरम करने और त्वचा की बनावट को बनाए रखने में मदद करता है। इसके नियमित उपयोग से आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है। कुंकुमादि तेल त्वचा को पोषण प्रदान करता है और त्वचा स्वास्थ्य बनता है। इसका नियमित उपयोग एंटी-एजिंग काम करता है और त्वचा को युवा और स्वस्थ रखता है।

किस तरह से करें कुमकुमादि तेल का उपयोग

इस तेल का उपयोग चेहरे पर किया जा सकता है, इसलिए इसके उपयोग को करने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।

तेल को उपयोग करने से पहले अपना हाथों को अच्छी तरह साफ कर लें, साथ ही चेहरे की त्वचा को भी साफ करें।

कुमकुमादि तेल की कुछ बूँदें अपने हाथों में लेकर चेहर पर लगाएं और 5 से 10 मिनट तक उंगलियों से मसाज करें। मालिश कुमकुमादि तेल के अवशोषण को बढ़ाती है।

नोट: बता दें कि इस तेल को लगाने के बाद कुछ घंटो तक ना धुलें, ऐसा करने से इसका प्रभाव कम हो जात है। इसे लगाने के बाद कम से कम 3 घंटे के लिए छोड़ दें। यदि आपकी स्किन ऑयली हो तो इस तेल को कम से कम 1 घंटे के लिए लगा रहना दें उसके बाद ही चेहरे को धुलें। अधिक उपयोगी प्रभावों के लिए वे इसे सोने से पहले लगा सकते हैं और रात भर के लिए इसे छोड़ सकते हैं। धब्बों, चोट के निशान, हाइपरपिगमेंटेशन में, इसे सोने से पहले लगाना चाहिए और रात भर के लिए छोड़ देना चाहिए।

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कुमकुमादि तेल के दुष्प्रभाव

कुमकुमादि तेल पूरी तरह से औषधीय है अत: इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। हालाँकि, यह कुछ तैलीय प्रभाव पैदा करता है, जो ऑयली त्वचा वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है।

तैलीय त्वचा

ऑयली स्किन वाले व्यक्तियों को चेहरे से अतिरिक्त तेल निकालने के लिए इसे लगाने के एक घंटे के बाद अपना चेहरा धोना चाहिए। तैलीय त्वचा वाले व्यक्ति कुमकुमादि लेप का उपयोग भी कर सकते हैं, जिसे बिना तेल मिलाये गुलाब जल मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।