महाभारत युद्ध के अद्भुत रहस्य, जिसको 99% लोग नहीं जानते?

आप सभी लोगों ने महाभारत के बारे में तो सुना ही होगा परंतु ज्यादातर लोग महाभारत के युद्ध से जुड़ी हुए कई रहस्य को नहीं जानते हैं? महाभारत में कई घटना संबंध और ज्ञान विज्ञान के रहस्य छुपे हुए हैं महाभारत का हर पात्र जीवंत है महाभारत मात्र योद्धाओं की कहानियो तक सीमित नहीं है, महाभारत में बहुत ही अद्भुत रहस्य छुपे हुए हैं, दरअसल, महाभारत की कहानी युद्ध के बाद ही समाप्त नहीं हो जाती, सही मायने में महाभारत की कहानी युद्ध के बाद ही आरम्भ होती है आज तक अश्वत्थामा क्यों जीवित है? क्यों यदुवंशियों के नाश का श्राप दिया गया और क्यो धर्म चल पड़ा था? इसी प्रकार के महाभारत में बहुत से रहस्य है जो अभी तक सुलझ नहीं पाए है।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम महाभारत के युद्ध से जुडी ऐसे कुछ रहस्य बताने जा रहे हैं जिन रहस्य को शायद ही आप जानते होंगे?

आइये जानते है महाभारत के युद्ध से जुड़े रहस्यों के बारे में

ऐसा बताया जाता है कि महाभारत के युद्ध में 18 संख्या का बहुत महत्व था, महाभारत की पुस्तक में 18 अध्याय हैं, कृष्ण ने कुल 18 दिन तक अर्जुन को ज्ञान दिया था, 18 दिन तक ही महाभारत का युद्ध चला था, गीता में भी 18 अध्याय है, इस युद्ध के प्रमुख सूत्रधार भी 18 थे, इस युद्ध में कुल 18 योद्धा ही जीवन बचे थे अब यहां पर ये सवाल आता है कि सब कुछ 18 की संख्या में क्यों होता गया था? क्या यह एक संयोग था या फिर इसमें कोई राज छुपा हुआ है।

महाभारत का युद्ध जब तय हो गया था तो बर्बरीक ने युद्ध में सम्मिलित होने की इच्छा जताई थी और मां को हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन दिया था बर्बरीक अपने नीले रंग के घोड़े पर सवार होकर तीन बाण और धनुष के साथ कुरुक्षेत्र की रणभूमि में पंहुचा था बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिस बल पर वह कौरव और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकता था यह जानकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण के वेश में उसके सामने उपस्थित होकर छल पूर्वक उनका शीश मांग लिया था बर्बरीक ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की थी कि वह महाभारत के अंत तक युद्ध देखना चाहता है तब भगवान श्री कृष्ण ने उसकी यह इच्छा पूरी की थी कृष्ण जी ने उसका शीश ऐसी जगह रख दिया जहाँ से वह महाभारत का युद्ध देख सके, बर्बरीक ने महाभारत के युद्ध का पूरा जायजा लिया था , अब सोचने वाली बात यह है कि बर्बरीक पांडव भीम के पुत्र और नागकन्या अहिलवती का पुत्र था परन्तु कहीं-कहीं पर मुर दैत्य की पुत्री कामकंटकटा के उधर से भी इनके जन्म की बात कही गयी थी।

महाभारत के समय राशियां नहीं हुआ करती थी ज्योतिष 27 नक्षत्रों पर आधारित था, न कि 12 राशियों पर, नक्षत्रों में पहले स्थान पर रोहिणी था, न कि अश्विनी जिस प्रकार समय गुजरता गया वैसे वैसे विभिन्न सभ्यताओं में ज्योतिष में प्रयोग किए और चंद्रमा और सूर्य के आधार पर राशियां बनाई गयी तब जाकर लोगो का भविष्य बताना शुरू किया गया, महाभारत में इस तरह की विद्या का कोई उल्लेख नहीं मिलता जिससे पता चले की ग्रह नक्षत्र व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालता है।

क्या अभी तक अश्वत्थामा जीवित है? इस बात को विज्ञानं नहीं मानता की कोई इंसान हजारो सालो तक जिन्दा रह सकता है ज्यादा से ज्यादा 150 साल तक इंसान जिन्दा रह सकता है ऐसी स्तिथि में कैसे माना जाये की अश्वत्थामा अभी भी जिन्दा है।