मेडिकल साइंस का चमत्कार: 40 डॉक्टर, 16 घंटे सर्जरी और फिर अलग हुए जग्गा- कलिया

मेडिकल साइंस की दुनिया में इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है.. दिल्ली के एम्स में पहली बार दो जुड़वा बच्चों के दिमाग को अलग करने की सफल सर्जरी हुई है। उड़ीसा के रहने वाले दो जुड़वा बच्चे जग्गा और कालिया के दिमाग आपस में जुड़े हुए थे। एम्स में डॉक्टरों की टीम ने उनके जुड़े हुए दिमाग अलग कर दिए हैं। ये ऑपरेशन 40 डॉक्टरों की टीम ने किया जो ऑपरेशन 16 घंटे तक चला।  बच्चें फिलहाल वो आईसीयू में हैं पर डॉक्टर्स का कहना है कि आने वाले 3 हफ्ते उनके लिए बहुत मुश्किल होने वाले हैं।

भुइया कंहरा और उनकी पत्नी पुष्पांजलि कंहरा ओडिशा के कंधमाल ज़िले के रहने वाले हैं जिनके ढ़ाई साल के जुड़वा बच्चें जग्गा और कालिया जन्म से एक दूसरे से जुड़े हुए थे। पेशे से किसान कंहार परिवार ने अपने बच्चों का शुरू में कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने की कोशिश की लेकिन जब ये कोशिशें सफ़ल नहीं हुईं तो भुइया कंहार अपने बच्चों को लेकर वापस अपने गांव चले गए। कटक के अपने गांव मिलिपाडा पहुंचे भुइया कंहार अपने बच्चों के ठीक होने की पूरी उम्मीद खो चुके थे, लेकिन फ़िर एक मीडिया रिपोर्ट में इन बच्चों का ज़िक्र हुआ और इसके बाद ज़िला प्रशासन ने ज़रूरी कदम उठाकर बच्चों को दिल्ली के एम्स में बच्चों का इलाज कराने के लिए ज़रूरी बंदोबस्त किया

ऐसे हुआ ये मैराथन ऑपरेशन

एम्स की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, “ये ऑपरेशन 25 अक्टूबर को सुबह छह बजे शुरू हुआ। इसमें 20 सर्जनों और 10 एनीस्थीसिया विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.. इसकी सर्जरी 16 घंटे चली और 20 घंटे एनीस्थीसिया में लगे.. बुधवार को रात 8:45 बजे बच्चे के सिर अलग कर लिए गए.”

ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों के दल में शामिल न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता के अनुसार दोनो बच्चों के सर में एक ही नस थी, पहले उनके सर में दूसरी नस लगाई गई और ब्लड की कमी थी उसे दूर किया गया। अब तक ऐसे केस में 90 फीसदी चांस कम होता है बचने का.. मगर हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे स्वस्थ हों फिलहाल वो आईसीयू में हैं और आने वाले 3 हफ्ते बहुत मुश्किल होने वाले हैं।

“कॉमन सर्कुलेशन यानी रक्त संचारण एक ही होने के कारण एक बच्चे का फ्लूड (तरल पदार्थ) दूसरे बच्चे में जा रहा था. इस वजह से अलग से सर्कुलेशन (रक्त संचारण) देना एक ज़रूरी काम था. ऑपरेशन के दौरान एक बच्चे के हार्ट फेल की स्थिति बन गई थी तो दूसरे बच्चे की किडनी पर असर पड़ रहा था.”

“इन बच्चों को सिर से अलग करने के लिए एक अलग तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. जिस तरह से हार्ट की बायपास सर्जरी होती है, उसी तरह से ये ब्रेन की बायपास सर्जरी की गई. इसे एक तरह से हिंदुस्तान का एक नया जुगाड़ या नई टेकनीक कही जा सकती है.”

ऑपरेशन की चुनौतियां

ये मेडिकल साइन्स के जगत की बड़ी उपलब्द्धी है जिसे एम्स ने कर दिखाया है हालांकि एम्स में भी इससे पहले ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं हुआ था लिहाजा सबसे पहले 20 सर्जन डॉक्टर की एक टीम बनाई गई. कुल तीन सबसे बड़ी कठिनाई टीम के सामने आई।

  • डॉक्टर ने पाया कि दोनों के दिमाग में एक ही नस थी लिहाजा सबसे पहले दूसरी नस लगाई गई।
  • उसके बाद यह परेशानी आई कि उनकी चमड़ी नहीं थी. इसीलिए चमड़ी तैयार की गई ताकि जब दो सर अलग हों तो दोनो के सर में चमड़ी रहे।
  • बच्चों में खून की कमी थी. पहले उन्हें खून दिया गया और उनकी सेहत में सुधार लाया गया ताकि उनका ऑपरेशन हो सके।

आगे की राह है मुश्किल

आगे बच्चों की सेहत कैसी रहेगी इस सवाल पर डॉक्टर दीपक कहते हैं, “ऑपरेशन से जुड़ी आशंकाओं और उम्मीदों के बारे में अभी कहना मुश्किल है। वे फिलहाल ठीक है, ऑपरेशन के दौरान उन्हें कोई दिक्कत पेश नहीं आई लेकिन ये लंबी लड़ाई है। इसमें कम से कम दो से तीन महीने लग सकते हैं। ऐसे बच्चों को दिल का दौरा पड़ने, गुर्दे नाकाम होने, मेनिनजाइटिस, संक्रमण जैसी चीज़ों की संभावना रहती है।

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