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म्यांमार की हालत और हिन्दू कब्रों पर भारत ने आखिरकार तोड़ी अपनी चुप्पी, कहा ये..

नई दिल्ली: म्यांमार की हालत दिन-प्रतिदिन खराब ही होती जा रही है। बड़े स्तर पर वहाँ हिन्दुओं और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को बर्बरता का सामना करना पड़ रहा है। वहाँ की सेना ने भी दावा किया था कि उन्हें कई हिन्दुओं की कब्रें मिली हैं। आख़िरकार भारत ने म्यांमार में मिले हिन्दू कब्रों पर अपनी चुप्पी तोड़ ही दी। भारत सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अपना पक्ष रखा। हालांकि तीन अक्टूबर को राजनयिकों द्वारा घटनास्थल के दौरे में भारतीय अधिकारीयों के शामिल होनें को लेकर स्पष्ट नहीं किया है।

किसी भी स्थिति में नहीं ठहराया जा सकता आतंकवाद को जायज:

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि, हमनें भी उन हिन्दू कब्रों के बारे में प्रेस की रिपोर्ट्स देखी है। साथ ही हमने म्यांमार के स्टेट काउंसलर द्वारा जारी किये गए बयान को भी देखा है। कुमार ने कहा कि भारत हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है और आतंकवाद की किसी भी घटना को किसी भी स्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष की स्थिति में हम उम्मीद करते हैं की सरकार हमले के दोषियों को जरुर शिकंजे में लाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ितों की हर अम्भव मदद की जाएगी। इससे उनमें सुरक्षा की भावना बनेगी और स्थिति सामान्य हो सकेगी। संवाददाताओं के सवाल का जवाब देते हुए कुमार ने कहा कि भारत इस बात से अवगत है म्यांमार सरकार ने विश्व के राजनयिकों को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करनें के लिए बुलाया है। जब संवाददाताओं ने यह पूछा की क्या भारतीय राजनयिक भी वहाँ जायेंगे तो उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार देश के उच्च मीडियाकर्मी भी वहाँ जायेंगे।

सेना को प्राप्त हुई 28 हिन्दुओं की सामूहिक कब्रें:

भारत सरकार की भागीदारी को लेकर वह अनभिग्य हैं। म्यांमार से आनें वाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हिंसा प्रभावित राखिन प्रान्त में हिन्दुओं की 28 सामूहिक कब्रें मिली हैं। इन कब्रों को ढूँढने वाली म्यांमार सेना ने इसके पीछे म्यांमार के विद्रोहियों को दोषी ठहराया है। वहाँ के सेना प्रमुख की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार सुरक्षा बलों को 28 हिन्दुओं के शव बरामद हुए हैं। यह कहा जा रहा है कि इन लोगों को एआरएसए के आतंकियों ने क्रूरता से मारा है।

रोहिंग्या के मुद्दे और म्यांमार और बांग्लादेश के बीच भारत की तरफ से मध्यस्थता की सम्भावना के बारे में कुमार से पूछने पर उन्होंने बताया कि हम म्यांमार की सीमा से आनें वाले लोगों को ऑपरेशन इंसानियत के तहत मानवीय सहायता पर ध्यान दे रहे हैं। दोनों देश इस स्थिति के बारे में एक दुसरे के संपर्क में हैं। हम बांग्लादेश को इस स्थिति से निपटनें के लिए हर संभव मदद कर रहे हैं।

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