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84 साल की उम्र में छलका रतन टाटा का दर्द, कहा- अकेला रहना बहुत मुश्किल..

देश के मशहूर उद्योगपति और टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने मंगलवार को बुजुर्गों की सेवा के लिए के स्टार्टअप ‘गु़ड फेलोज’ में निवेश करने का ऐलान किया है। इस खास मौके पर उन्होंने कई बातें की। इस दौरान रतन टाटा ने यह भी साझा किया कि अकेलापन कैसा होता है। बता दे इस स्टार्टअप को शांतनु नायडू ने शुरू किया है। शांतनु नायडू टाटा ऑफिस में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत है वह अक्सर रतन टाटा के साथ नजर आते हैं। यह स्टार्टअप युवाओं को बूढ़े लोगों का सहारा बनाएगा। यहां पर युवा बुजुर्गों के साथ के कैरम खेलेंगे, अखबार पड़ेंगे और आराम करने में उनकी मदद कर पाएंगे।

ratan tata

बुढ़ापे पर छलका रतन टाटा का दर्द
इस स्टार्टअप की शुरुआत के दौरान रतन टाटा ने कहा कि, “आपको तब तक अकेले होने का मतलब समझ नहीं आता, जब तक आप एक साथी की चाह में अकेलापन महसूस नहीं करते हैं। आपको बूढ़े होने से डर नहीं लगता, लेकिन जब आप बूढ़े हो जाते हैं तो आपको समझ आता है कि दुनिया बहुत मुश्किल है। जब तक आप वास्तव में बूढ़े नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी बूढ़े होने मन बिल्कुल भी नहीं करता। बुजुर्गों की अकेलेपन की समस्या दूर करने के लिए ऐसे स्टार्टअप शुरू होना खुशी की बात है।”

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वहीं इस मौके पर शांतनु नायडू ने कहा कि, “इस स्टार्टअप का आइडिया उनको रतन टाटा के साथ उनकी खुद की घनिष्ठता से आया। साढ़े पांच सालों के अंतर वाले दोनों लोगों की यह दोस्ती दो पीढ़ियों के बीच दोस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण है।” रिपोर्ट की माने तो कंपनी वित्तीय राजधानी मुंबई में अपने बीटा चरण में बीते छह महीनों से 20 बुजुर्गों के साथ काम कर रही है। कहा जा रहा है कि, आने वाले समय में कंपनी पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु में भी अपनी सेवाएं देना चाहती है।

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84 साल की उम्र में कुंवारे हैं रतन टाटा
बात की जाए रतन टाटा की निजी जिंदगी के बारे में तो उन्हें नौकरी के दिनों में एक लड़की से प्यार हुआ था लेकिन उनका रिश्ता शादी के मुकाम तक नहीं पहुंच पाया। एक इंटरव्यू के दौरान खुद रतन टाटा ने अपनी प्रेम कहानी के बारे में खुलासा करते हुए बताया था कि, “मुझे लॉस एंजेलिस में नौकरी करने के दौरान प्यार हो गया था और शादी तक होने वाली थी।

लेकिन मैंने उसी वक्त अस्थायी रूप से भारत लौटने का फैसला कर लिया था क्योंकि इस समय पर मेरी दादी की तबीयत खराब थी और मैं उनसे लगभग 7 सालों से दूर था। ऐसे में, मैं अपनी दादी से मिलने के लिए भारत आया और सोचा कि जिससे मैं शादी करना चाहता हूं वह मेरे साथ भारत आएगी। लेकिन इसी दौरान 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण मेरे माता-पिता शादी के लिए राजी नहीं हुए और हमारा रिश्ता टूट गया।”

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