नई दिल्ली – हलाला अब एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो बुर्के से निकलकर समाज से सवाल कर रहा है। सवाल ये कि आखिर कब तक मुस्लिम महिलाओं को बुर्के के अंदर रहना पड़ेगा, कबतक उनको हलाला जैसी ज्यादतियों से गुजरना पड़ेगा। हालांकि, ये मुद्दा उस वक्त से चर्चा का विषय है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान इसे सबसे बदतर कानून बताया था। तब से लेकर अब तक इसपर अलग-अलग जगहों और अलग-अलग लोगों के बीच चर्चाएं जारी हैं। Muslim victim on halala issue.

‘निकाह के सौदागरों’ की खुली पोल  

कुछ दिन पहले एक निजी चैनल ने मुस्लिम महिलाओं पर हलाला और तीन तलाक के नाम पर हो रही ज्यादती के मद्देनजर एक स्टिंग ऑपरेशन किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में कई काजी, मौलानाओं से हलाला और तीन तलाक पर बात की गई। स्टिंग में इस बात का खुलासा हुआ कि मौलानाओं और काजीयों ने हलाला के रेट भी तय किए हुए हैं। इसी विषय पर चैनल आज तक पर एक पैनल बैठाई गई।

इस पैनल में बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा, अतीकुर रहमान, मौलाना साजिद रशीदी, संघ विचारक राकेश सिन्हा, पीड़ित महिलाएं शाजिया शान, रुबिना और रिशा खान शामिल थे। चर्चा के दौरान एक मौलाना साजिद रशीदी को मुंह छुपाने की नौबत आ गई जब शाजिया खान ने पूछा कि एक लड़के को 1000 रुपए में खरीद कर उससे हलाला कराया गया था, वो क्या था।

क्या है ‘हलाला’ विवाह, क्यों देनी पड़ते हैं पैसे

हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी इस बात का जिक्र हुआ है कि कुछ मुस्लिम महिलाओं को तलाक के बाद अपनी शादी बचाने के लिए भारी कीमत देकर ‘हलाला’ विवाह करना पड़ता है। हालांकि, इस कानून को कुछ ही मुस्लिम मानते हैं, लेकिन इस बेबुनियादी परंपरा में तलाक के बाद महिला अगर फिर से अपने पति के पास जाना चाहती है तो उसे इसके लिए किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी पड़ती है और फिर उसे तलाक देकर अपने पहले पति से शादी करनी होती है।

इस चर्चा के दौरान रुबीना खान ने कहा कि मेरे पति ने मुझे तलाक दे दिया और मेरे बच्चों को भी छीन लिये। वो अब दूसरी शादी करने जा रहे हैं। रुबीना की इस बात पर पैनल में शामिल राकेश सिन्हा और मौलाना रशीदी के बीच दमकर बहस हुई। इस बहस के बीच शाजिया खान ने कहा कि हिंदू धर्म में भी औरतें घुट-घुट कर जी रही हैं, लेकिन उन्हें मुस्लिम महिलाओं के जैसे तीन तलाक के कारण सड़क पर तो नहीं आना पड़ता।

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