नई दिल्ली: प्रदेश की योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही प्रदेश के विकास के लिए कई नए कदम उठाये। इसमें मुख्यतौर पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कदम उठाये गए। सबसे पहले योगी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एंटी रोमियो दल का गठन किया। अब प्रदेश सरकार माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को भाषाई तौर पर और भी स्मार्ट बनाने के प्रयास में जुट चुकी है।

अब से प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को जर्मन, फ्रेंच, उर्दू और अरबी भाषाओँ को सिखाया जायेगा, ताकि जब वह विदेश में पढ़ाई या काम के लिए जाएँ तो उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े। इसके लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजना के तहत रुपरेखा तैयार की गयी है। सरकार यह चाहती है कि माध्यमिक स्कूलों के बच्चों को फ्रेंच, जर्मन, उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओँ में पारंगत किया जाये।

जिला स्तर पर किया जायेगा विदेशी भाषा के शिक्षकों का डाटा:

इसके लिए अपर राज्य निदेशक की तरफ से आदेश भी जारी किया जा चुका है। आदेश जारी होने के बाद से जिला स्तर पर विदेशी भाषा के अध्ययन से जुड़े शिक्षकों का डाटा तैयार किया जा रहा है। कॉलेजों के डाटा प्राप्त हो जाने के बाद उस डाटा को माध्यमिक शिक्षा की वेबसाइट पर अपलोड किया जायेगा। इसके साथ ही उन छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो विदेशी भाषा सीखना चाहते हैं। स्कूलों के अलावा अलग से कक्षाओं का संचालन करके विदेशी भाषा का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

विदेशी भाषा और इसकी उपयोगिता के बारे में दी जाएगी जानकारी:

सभी विद्यालय के प्रधानाचार्यों को इसका प्रचार-प्रसार करने का जिम्मा दिया जायेगा। सभी स्कूलों में विदेशी भाषा के बारे में जानकारी दी जाएगी साथ ही उसकी उपयोगिता के बारे में भी बताया जायेगा। डीआईओएस कार्यालय से सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर कहा गया है कि जो शिक्षक फ्रेंच, जर्मन, फारसी, अरबी और उर्दू भाषा का ज्ञान रखते हैं और छात्रों को सिखाना चाहते हैं, उनकी सूची उपलब्ध करवाई जाए।

हर साल लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं यूपी में:

हालांकि अभी तक कोई सूची उपलब्ध नहीं करवाई गयी है। बहुभाषी होने के बाद छात्रों को पर्यटन और होटल के क्षेत्र में रोजगार मिलने की संभावनाएं बढ़ जायेंगी। आपको बता दें उत्तर प्रदेश में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जहाँ हर साल लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। आने वाले इन विदेशी पर्यटकों को बहुभाषीय गाइडों की जरुरत पड़ती है। इन्ही की वजह से होटलों में भी बहुभाषीय कर्मचारियों की माँग बनी रहती है। प्रदेश शिक्षा बोर्ड में सबसे पहले इसकी पहल यूपी बोर्ड ने की है।

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