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स्वतंत्रता दिवस : मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, इस बार 21 तोपों की सलामी होगी ‘सॉउन्ड प्रूफ’

स्वतन्त्रता दिवस पर इस बार 21 तोपों की सलामी तो होगी पर नही होगा ….धमाका । असल में हर साल इस मौके पर होने वालें तोपों के धमाके से लालकिला और पास की मेट्रों हेरिटेज लाईन को नुकसान पुँहचने की आशंका को ध्यान में रखतें हुए ये फैसला सुरक्षा एजेंसियों ने लिया है। इसके लिए अब तोपों के धमाके के प्रभाव को कम से कम करने के लिए विशेष इन्तेज़ाम किए गए हैं।

लालकिले की सुरक्षा के लिए लिया गया है फैसला

लालकिला सिर्फ एक इमारत नही है बल्कि ये हमारे देश की शान है और हर साल 15 अगस्त पर यहां भव्य आयोजन होता है पर इसी मौके पर होने वाली 21 तोपों की सलामी इसे बीते सालों से नुकसान पहुँचा रही है। इस पर भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण ने व्यापक परिक्षण किया और प्राप्त आकङों के आधार पर तोपों के प्रभाव से लालकिले को हो रहे नुकसान के लिए भारत सरकार को चेताया तब जाकर ये मामल संज्ञान में आया।

सर्वेक्षण में ये तथ्य सामने आया कि तोपों के धमाके से उत्पन्न कंपन का असर आसपास 150 मीटर के इलाके तक होता है चूँकि लालकिला व मेट्रो का भूमिगत लालकिला मेट्रो स्टेशन इस दायरें में आता है इसलिए इस धमाके से लालकिले की इमारत और मेट्रो स्टेशन के उपकरणों को नुकसान पहुँचने की सम्भावनाएं बढ जाती है। इसके बाद सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इसके लिए कारगर कदम उठानें का निर्णय लिया और अब इसी प्रयोजन से इस बार 15 अगस्त के लिए विशेष प्रबन्ध किए गए हैं।

कैसे होगी ये सॉउन्ड प्रूफ सलामी

तोपों के लिए अधिक गहराई के गढ्ढ़े बनाए गए हैं और इन गढ्ढ़ों के चारो ओर बालू का टीला बनाया गया है ताकि तोपों के धमाके से कम से कम कंपन उत्पन्न हो। इससे पहले भी भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण के सुझाव पर भारतीय सेना सलामी का स्थान बदल चुकी है। कुछ साल पहले तक लाल किले के बिल्कुल नजदीक तोपों को लगाया जाता था पर अब लालकिले के पार्क के दक्षिणी छोर से सलामी दी जाती है।

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