पति की सुरक्षा के लिए सुहाग और अच्छा पति पाने के लिए कुँवारी कन्याएं करें यह काम

भाद्रपद का महिना शुरू हो गया है। हिन्दू धर्म में इस महीने का काफी ज्यादा धार्मिक महत्व है। अभी भगवान शंकर का प्रिय महिना सावन ख़त्म ही हुआ है। इस महीने में शिव भक्त भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कई प्रयत्न कर चुके हैं। सावन में पड़ने वाले सोमवार को पुरुष और महिलाएँ दोनों ने व्रत रखे थे। भगवान शंकर सावन में किये गए विशेष उपाय से काफी ज्यादा प्रसन्न होते हैं।

पूजा जाता है माता पार्वती के श्यामला रूप को:

कजरी तीज का पर्व कल पड़ रहा है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का भी विशेष महत्व है। कजरी तीज के दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता श्यामला का पूजन किया जाता है। कजरी तीज के दिन सुहागनें और कुँवारी लडकियां माता पार्वती के श्यामला रूप की पूजा करती हैं। कजरी तीज के दिन तीन बातों का ख़ास ध्यान रखा जाता है, जिन्हें नहीं करना चाहिए। पहला पति से छल, दूसरा दुर्व्यवहार और तीसरा परनिंदा।

सजने-सँवरने का का होता है विशेष महत्व:

इस दिन सुहागन औरत तीज को अपने पीहर या मामा के घर मनाती हैंइस दिन यह परम्परा है कि सुहागन और विभिन्न तरह के पकवान बनाकर अपनी सास के पाँव छूकर उन्हें भेंट करती हैं। कजरी तीज के दिन सजने-संवरने का विशेष महत्व होता है। इस दिन महिलाएँ अपने पैर में मेहन्दी जरुर लगाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन माता पार्वती विरहाग्नि में जलकर काली हो गयी थीं।

इस दिन घर में झूला डालने की है परम्परा:

इसी दिन उन्होंने अपना काला रंग त्यागकर भगवान शिव से मिलन किया था। इस दिन पीपल, कदम्ब और बरगद के पत्ते देवी के ऊपर चढ़ाये जाते हैं। इस दिन शिव-पार्वती और भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा करनी चाहिए। विशिष्ट हविद्रव्य जैसे पीपल, कदम्ब और बरगद से हवन करना शुभ माना जाता है। इसी दिन घर में झूला भी डाला जाता है। इस दिन सुहागन अपने पति की सलामती के लिए और कुँवारी कन्यायें अच्छे पति प्राप्त करने के लिए व्रत रखती हैं।

भगवान की कृपा से नहीं होती धन सम्बन्धी कोई समस्या:

इस दिन गेंहू, चना, जौ और चावल के सत्तू में घी मिलाकर पकवान बनाए जाते हैं। इस व्रत में शाम के समय ही व्रत खोला जाता है। बनाये हुए पकवान को खाकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन काली गाय को आटे की 7 रोटियाँ बनाकर उसमें गुड़ चना रखकर उन्हें खिलाया जाता है। कजरी के दिन विशेष पूजा करने से पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव-पार्वती और श्रीकृष्ण की कृपा से धन सम्बन्धी कोई समस्या नहीं होती है। सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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