आज के दिन वो जनक्रान्ति नही होती, शायद हमारे नसीब में 15 अगस्त का दिन नही आता

आज से एक सप्ताह बाद 15 अगस्त को हम 70वाँ स्वतन्त्रा दिवस मनाने जा रहे हैं पर क्या आपको पता है कि इतिहास में अगर आज के दिन (8 अगस्त), उस जन आन्दोलन की नीव ना पङती तो शायद हम भारतीयों के नसीब में 15 अगस्त का दिन भी नही आता। हम बात कर रहे हैं “भारत छोङो आन्दोलन” की, वो जन क्रान्ति जिसने अंग्रेजो की चैन छीन ली और अंग्रेजी हूकूमत को ये एहसास कराया की अब उनके बोरिया बिस्तर समेटनें का समय आ गया है। 8 अगस्त 1942 में “करो या मरो” नारें के साथ महात्मा गाँधी ने इसका आगाज किया था और उनके आह्वाहन भारतीय जनमानस का सैलाब उमङ पङा था। Bharat Chhodo Andolan.

स्वतन्त्रता आन्दोलन का सबसे सफल अध्याय

8 अगस्त 1942 को जिस जन क्रान्ति का आगाज हुआ वो वास्तव में पिछले कई सालों से चल रही स्वतन्त्रता आन्दोलन का उफान था। महात्मा गांधी ने अंग्रेजी हूकूसत के खिलाफ भारतीय जनमानस में व्याप्त असंतोष और आक्रोश को चिंगारी देने के लिए बङे ही रणनीतिक तरिके से इस क्रान्ति का सुत्रपात किया।  बम्बई में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 7 अगस्त को आयोजित की गई .. 8 अगस्त को “भारत छोङो आन्दोलन” का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया ..प्रस्ताव पारित होने के बाद ब्रिटिश पुलिस ने उसी रात महात्मा गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया .. और फिर जनआक्रोश की चिंगारी पूरे देश में भङक उठी। इस आन्दोलन में करो या मरों का नारा लगाते हुए दस हजार से अधिक भारतीय शहीद हुए, एक लाख से अधिक क्रान्तिकारी गिरफ्तार हुए ।

करो या मरो को मूलमंत्र

इस आन्दोलन का आगाज महात्मा गांधी ने करो या मरों के उद्घोष से किया था ..इस मौके पर 70 मिनट के भाषण में उन्होनें वो शब्द बाण चलाए जिसने भारतीय जनमानष को उद्दोलित कर दिया..

“मै एक ही चींज लेने जा रहा हूँ…आजादी!, नही देना है तो कत्ल कर दों। आपको एक ही मंत्र देता हूँ करेंगे या मरेगें। आजादी डरपोकों के लिए नही है..जिनमें कुछ कर गुजरने की ताकत रहती है वही जिन्दा रहते हैं..”

और महात्मा गांधी के ये ललकार सुनकर लाखों भारतवासी जंगे आजादी की आहूति में कूद पङे।

 अंग्रेजी हूकूमत के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ

इस आन्दोलन की कामयाबी का सबसे बङा कारण ये था कि इसने बौद्धिक, पढ़े लिखें लोगो के साथ साथ आम जन को भी आजादी के मायने बताएं और भारत के विशाल जनमानष को इस स्वतन्त्रता आन्दोलन से जोङ दिया । फलस्वरूप क्रान्ति ने इतना व्यापक रूप ले लिया कि ब्रिटीश राज की नींव पूरी तरह हिल गई थी और आन्दोलन अपने मकसद में सफल रहा… दूसरे विश्वयुद्ध के समापन के साथ ही अंग्रेजी हूकूमत का सूरज भी ढ़ल गया और 15 अगस्त को भारतीय स्वतन्त्रा के सूर्योदय हुआ।