चीन ने भारत को उकसाने के लिए कसा तंज, भारत को उकसाने के लिए अब चल दी ये नयी चाल

बीजिंग: भारत को अब दो देशों से लोहा लेना पड़ रहा है। एक तरफ पाकिस्तान भारत की नाक में दम किये हुए हैं, वहीँ चीन भी कुछ कम नहीं है। भारत और चीन के बीच स्थितियाँ दिन-प्रतिदिन बद से बद्तर होती जा रही हैं। इधर भारत अपनी सेना हटाने के लिए तैयार नहीं है और उधर चीन अपने कड़वे बोल बोलने से बाज नहीं आ रहा है। चीन समझ चुका है कि भारत अब अपनी सेना सीमा से नहीं हटाने वाला है।

चीन अब भारत को उकसाने का काम कर रहा है :

अब चीन के पास कोई चारा नहीं बचा है। इसलिए चीन ने भारत को उकसाने का काम शुरू किया है। चीनी राजनयिक और वहाँ की मीडिया पिछले कुछ दिनों से भारत को उकसाने के लिए कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं, जिससे भारत कोई कदम उठाये। लेकिन भारत चुपचाप सुन रहा है। भारत को पता है कि चीनी उसे चढ़ाकर अपना काम निकलवाना चाहते हैं।

अभी हाल ही में चीन ने कहा है कि भारत को सीमा पर शांति कायम रखने की इच्छा अपने कामों से दिखानी चाहिए। चीन का दावा है कि सीमा पर चीन की तरफ से एक सड़क बनाने के उसके प्रयासों को रोकने के लिए डोकलाम क्षेत्र में भारत ने बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है। एक बयान में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि भारत की तरफ से जो भी कदम उठाये जाते हैं वह लापरवाही भरे और गैरजिम्मेदाराना होते हैं।

सीमा पर भारी मात्रा में भारतीय सैनिक तैनात:

गेंग ने कहा कि कुछ दिन पहले तक डोकलाम में 48 सैनिक और एक बुलडोजर था। यह चीन की सीमा में घुसपैठ करने जैसा है, जबकि भारत इसे भूटान का क्षेत्र बताता है। गेंग ने कहा कि अब भी सीमा पर भारी मात्रा में भारतीय सैनिक तैनात हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कितने भारतीय सैनिकों ने अवैध रूप से सीमा पार की है और अभी भी चीनी क्षेत्र में हैं।

यह घटना अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत गलत है। भारत को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। गेंग ने फिर से कहा कि 18 जून को करीब 270 भारतीय सैनिक चीनी सीमा में घुस आये और चीन के सड़क निर्माण की योजना को बाधा पहुँचाना शुरू कर दिया। गेंग ने कहा कि भारत को अपने शब्दों से ज्यादा अपने काम से दिखाना चाहिए कि वह शांति चाहता है। भारत हमेशा शांति की बात करता है। लेकिन हमें केवल भारत के शब्दों को ही नहीं उसके काम को भी देखना चाहिए।

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