अध्यात्म

अगर आपका जीवन भी कष्ट और संघर्ष में गुजर रहा है तो इस दिन करें ये उपाय!

कुछ लोगों के जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ होती हैं, जबकि कुछ लोगों का पूरा जीवन कष्ट में बीतता है। व्यक्ति अपने जीवन के कष्टों के कारणों को भी नहीं जान पाता है। इसी वजह से वह इसका उपाय भी नहीं कर पाता है। केतु के नाराज हो जाने पर जातक को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। काम-वासना तीव्र हो जाने की वजह से व्यक्ति दुराचार की तरफ रुख करता है और बुरे काम करता है।

केतु होता है मिथुन राशि में नीच:

जिस व्यक्ति के ऊपर केतु का बुरा प्रभाव होता है उसे गर्भपात, पथरी, गुप्त रोग, असाध्य रोग, खांसी, सर्दी, वात-पित्त जन्य विकार और पाचन सम्बन्धी रोग होने की सम्भावना रहती है। केतु तमोगुणी प्रकृति का ग्रह माना जाता है और इसका वर्ण संकर है। केतु का स्वराशिमीन है और केतु धनु राशि में उच्च और मिथुन राशि में नीच होता है। वृष, धनु और मीन राशि में केतु बलवान होता है।

केतु की वजह से होती हैं जीवन में कई समस्याएँ:

ऐसा कहा जाता है कि जिस भाव के साथ केतु बैठा होता है, वह अपना अच्छा या बुरा प्रभाव जरुर डालता है। इसका विशेष फल 48 या 54 वर्ष की आयु में मिलता है। व्यक्ति के जन्म कुंडली के लग्न, षष्टम और एकादश भाव में केतु की स्थिति को शुभ नहीं माना जाता है। इसकी वजह से जातक के जीवन में कई तरह की समस्याएँ देखने को मिलती हैं। व्यक्ति का जीवन संघर्ष और कष्ट से भरा होता है।

 

 

धारण करें लाल चन्दन की माला:

केतु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को लाल चन्दन की माला को अभिमंत्रित कराकर शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार को धारण करनी चाहिए। इसके बाद केतु के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

‘पलाश पुष्प संकाशं, तारका ग्रह मस्तकं।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तम के तुम प्रण माम्य्हम।’

केतु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए धारण करें लहसुनिया रत्न:

इसके साथ ही आप अभिमंत्रित किये हुए असगंध की जड़ को नीले धागे में शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार को धारण करने से केतु के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलने लगती है। केतु ग्रह की शांति के लिए आप काले तिल, कम्बल, कस्तूरी, काले फूल, काले कपड़े, उड़द की काली दाल, काली छतरी और लोहे का दान करें। केतु रत्न लहसुनिया को शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी केतु के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल जाती है।

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