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खतरा! अंटार्कटिका में टूटकर अलग हुआ बडा हिमखंड, भारत के इस बडे हिस्से पर मंडरा रहा है डुबने का खतरा…

इंसान पिछले कई सालों से प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करता आ रहा है। लेकिन प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने का अंजाम बहुत बुरा होता है। पृथ्वी पर पिछले कुछ दशकों से जनसंख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। इंसान अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए कुछ भी कर रहा है। जंगल तबाह हो रहे हैं रोज़ हज़ारों पेड़ काटे जा रहे हैं लेकिन प्रदूषण घटने की बजाए लगातार बढता जा रहा है। जिसका पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड रहा है।

अंटार्कटिका हे टूटकर अलग हुआ बडा हिमखंड :

इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक बहुत भयानक खबर दी है। यह ख़बर है अंटार्कटिका से आई है। दरअसल अंटार्कटिका का एक बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। जो कि आकार में बहुत बड़ा है। अलग हुए इस हिमखंड का आकार 5800 वर्ग किलोमीटर है। यह हिस्सा भारत की राजधानी दिल्ली के आकार से 4 गुना बड़ा है। तो आप सोच सकते हैं कि यह कितनी ज्यादा तबाही मचा सकता है। वैज्ञानिकों को इस खतरे का पहले से एहसास था। वैज्ञानिकों ने इस हिमखंड के अलग होने के पीछे कार्बन उत्सर्जन को सबसे बड़ी वजह बताया है। यह हिमखंड अब तक के सभी हिमखंडो में सबसे बडा बताया जा रहा है।

भारत पर इसका क्या असर होगा :

भारत की तटीय रेखा लगभग 7500 किलोमीटर लंबी है। हिमखंड के अलग होने से वैश्विक समुद्री स्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। इस वजह से भारत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि भारत पर एकदम से इसका असर नहीं होगा लेकिन धीरे-धीरे इस का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस हिमखंड की वजह से भारत के अंडमान और निकोबार के कई द्वीप और बंगाल की खाड़ी में सुंदरवन के हिस्से डूब सकते हैं। इस से हिंद महासागर का तापमान भी बढ़ेगा। इसके साथ ही दुनिया के तमाम समुंद्र किनारे बसे नगरों पर भी इस का खतरा मंडरा रहा है।

मौसम पर भी पड़ेगा इसका असर :

पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग भी एक बडा खतरा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में भयानक बदलाव हो रहा है ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बर्फ के पिघलने से यह पदार्थ गर्मी में जल कर मिथेन के रूप में हमारी वातावरण में घुल जाएगा। इसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग और ज्यादा बढ़ेगी। अगर जल्द कुछ नहीं किया गया तो संपूर्ण विश्व को इसका नुकसान भुगतना पड़ सकता है।

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