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कलेक्टर ने अपनी बेटी का सरकारी स्कूल में दाखिला करवाकर पेश की एक मिसाल!

नई दिल्ली: आज के समय में शिक्षा ही एक ऐसी चीज है, जिसकी बदौलत कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है। आज के समय में जिसके पास अच्छी शिक्षा है, उसी की समाज में इज्जत होती है। पहले शिक्षा का मतलब ज्ञान पाना था। जबकि आज के समय में शिक्षा का मुख्य मकसद रोजगार पाना बन गया है। जितनी बेहतरीन शिक्षा उतनी अच्छी नौकरी।

अच्छी शिक्षा के लिए सभी भेज रहे हैं प्राइवेट स्कूल में:

देश के सरकारी स्कूलों की हालत काफी खस्ता चल रही है। ऐसे में कोई भी पैसे वाला व्यक्ति अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ना चाहता है। सब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं। आज भी देश के सभी सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की काफी कमी है। आज का समय पूरा का पूरा अंग्रेजी का है।

अगर आप अच्छी अंग्रेजी जानते हैं तो आपको समझ में इज्जत भी मिलेगी और अच्छी नौकरी भी मिलेगी। सरकारी स्कूलों में अच्छी अंग्रेजी सीख पाना तो काफी मुश्किल काम है। इसलिए आज के समय में हर माँ-बाप अपने बच्चों को मोटी रकम देकर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। ऐसे में एक कलेक्टर ने अपनी बेटी का सरकारी स्कूल में दाखिला करवाकर एक मिसाल पेश की है।

नौकरशाहों को दिया कड़ा सन्देश:

जी हाँ बलरामपुर के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने मजबूत इरादों से देश-प्रदेश के अन्य नौकरशाहों के बीच एक कड़ा सन्देश दिया है। उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाया है। आजकल सरकारी स्कूल में केवल गरीबों के बच्चे पढ़ रहे हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी का बच्चा सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ रहा है। नौकरी सबको आज के समय में सरकारी ही चाहिए, लेकिन अपने बच्चों को कोई भी सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ना चाहता है।

ऐसे में अविनाश कुमार का यह कदम पुरे देश में एक मिसाल पेश करने वाला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर अविनाश कुमार ने अपनी 5 वर्षीय बेटी का दाखिला एक सरकारी स्कूल में करवाया है। अपनी बेटी की प्राथमिक स्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय को चुना है। जिस जिले के कलेक्टर के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे, उम्मीद है उस जिले की शिक्षा व्यवस्था में जरुर सुधार होगा।

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