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खुलासा: ओसामा बिन लादेन की भागने में मदद किसी और ने नहीं बल्कि जैश और लश्कर ने की थी!

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नई दिल्ली: जब भी आतंकवाद का नाम आता है, दिमाग में सबसे पहले ओसामा बिन लादेन का चेहरा आता है। ओसामा बिन लादेन का खौफ इतना था कि लोग उसके नाम से कांपते थे। अमेरिका भी ओसामा से परेशान हो गया था। 9/11 के बाद से अमेरिका ओसामा की खोज में लग गया था। लेकिन ओसामा का पता काफी बाद में चला। ओसामा बिन लादेन पेशे से एक इंजीनियर था।

आज पूरी दुनिया आतंक से परेशान है। शायद ही कोई देश होगा जो आतंकवाद का दंश नहीं झेल रहा होगा। आतंक का गढ़ कहे जाने वाले पाकिस्तान में आये दिन बम धमाके होते हैं। बम धमाकों में वह खुद के लोगों को ही मार देते हैं। इसके अलावा अभी हाल ही में आतंकियों ने लन्दन में एक बड़े बम धमाके को अंजाम दिया था।

अफगानिस्तान की सीमा पार करने में की थी मदद:

ओसामा बिन लादेन और इसके जैसे कई आतंकियों के बारे में कई ऐसी बातें हैं, जो आम जनता को पता ही नहीं है। आज हम आपको ओसामा के जीवन की सबसे बड़ी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के अध्यक्ष हाफिज सईद ने 2001 में ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा के कई बड़े नेताओं को अफगानिस्तान की सीमा पार करने में मदद की थी।

केवल यही नहीं उन नेताओं को पाकिस्तान के एबटाबाद और अन्य शहरों में रहने का भी इंतजाम किया था। मसूद अजहर के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। वह एक बहुत ही बड़ा और खूंखार आतंकवादी है। पिछले कई सालों से भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसे आतंकवादी घोषित करने की मांग कर रहा है। वहीं चीन भारत की मांग का विरोध कर रहा है।

10 साल पाकिस्तान में छिपे रहने के बाद 2011 में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में मारा गया। इस बात का खुलासा एक ब्रिटिश खोजी पत्रकार ने अपनी पुस्तक में किया है। कैथी स्कॉट और एंडन लेवी की किताब “द एक्साइल” का विमोचन भारत में 29 मई को हुआ था। भारत इस समय मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के सम्बन्ध में चीन के फैसले का इंतजार कर रहा है।

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