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अगर चुनाव आयोग को मिल गया यह अधिकार तो बुरे फसेंगे केजरीवाल!

बीते दिनों पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर ईवीएम में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था, इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम हैकिंग का डेमो भी दिखाया था और यह साबित करने का प्रयास किया था कि ईवीएम मशीन को हैक करके पूर्व निर्धारित नतीजे पाए जा सकते हैं. हालांकि जब चुनाव आयोग ने ऐसा करने की चुनौती दी तो कोई भी नेता या पार्टी का कार्यकर्ता सामने नहीं आया.

ईवीएम के मुद्दे पर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई :

ऐसे में चुनाव आयोग ने अब आयोग की छवि बिगाड़ने वालों और ईवीएम के मुद्दे पर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मांगा है. चुनाव आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर आयोग की अवमानना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किये जाने का कानून बनाने की मांग की है. जिससे बिना आधार के आरोपों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके.

यह बात अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट से सामने आई है, रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971 में संशोधन की मांग की है. रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देकर बताया गया है कि चुनाव आयोग ऐसे प्रावधान की मांग कर रहा है जिसके तहत आयोग की अवमानना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके. रिपोर्ट में अनुसार आयोग ने कानून मंत्रालय को यह खत करीब एक महीने पहले लिखा था. साथ ही कानून मंत्रालय ऐसे प्रावधान पर विचाररत है, इतना ही नहीं आयोग ने अपने खत में पाकिस्तान समेत कई ऐसे देशों का उदाहरण भी दिया है जहां चुनाव आयोग अवमानना के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार रखता है.

आपको बता दें कि पाकिस्तान के इलेक्शन कमीशन ने अवमानना के खिलाफ अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस साल इमरान खान को नोटिस भेजा था, इमरान ने पाकिस्तान के चुनाव आयोग पर विदेशी फंडिंग के मामले में पक्षपात करने का आरोप लगाया था. हालांकि भारत में चुनाव आयोग ऐसी स्थिति में कोई कार्रवाई करने का अधिकार नहीं रखता है. चुनाव आयोग ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों के मद्देनजर यह मांग की है.

गौरतलब है कि न सिर्फ अरविन्द केजरीवाल जबकि मायावती और अन्य नेताओं ने भी ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. ऐसे में चुनाव आयोग की मांग के अनुरूप कानून में संशोधन होने के बाद केजरीवाल समेत कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.