अध्यात्म

नहीं जानते होंगे आप केदारनाथ और बद्रीनाथ से जुड़ी एक भविष्यवाणी के बारे में, जानकर हो जायेंगे हैरान!

भारत में अनेक देवी-देवताओं के धाम हैं। सभी धामों की महिमा अलग-अलग है। इन्ही में से दो ऐसे भी धाम हैं, जिनकी महिमा के बारे में किसी को बताने की जरूरत नहीं है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के बारे में तो आप जानते ही हैं। यह धाम पूरे विश्व के हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र जगह हैं। हर साल इन धामों में लाखों लोग दर्शन करने जाते हैं। वहां जाकर भक्तों के मन की सभी इच्छाएं भी पूरी हो जाती हैं।

भगवान देते थे साक्षात दर्शन:

सतयुग के समय में भगवान के दर्शन सभी लोगों को बड़ी आसानी से हो जाया करते थे। बद्रीनाथ की कथा के अनुसार उस युग में कड़ी तपस्या करने वाले ऋषि-मुनियों से लेकर साधारण मनुष्यों को भी भगवान विष्णु साक्षात दर्शन दिया करते थे। त्रेतायुग आने के बाद भगवान देवताओं और ऋषि-मुनियों को ही दर्शन देने लगे। लेकिन द्वापर आते-आते भगवान विलीन हो गए।

भगवान की जगह एक विग्रह की उत्पत्ति हुई और ऋषि-मुनियों से लेकर इंसानों को इसी विग्रह से संतुष्ट होना पड़ा। शास्त्रों में वर्णित है कि धीरे-धीरे पाप बढ़ता गया और भगवान के दर्शन दुर्लभ होते गए। द्वापर के बाद कलयुग आया, अब तो भगवान के दर्शन के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। पुराणों में बद्रीनाथ और केदारनाथ के बारे में एक कहानी है, जिसमें उनके रूठने का जिक्र मिलता है।

भगवान के सच्चे भक्तों का अकाल पड़ जायेगा :

पुराणों में यह भी वर्णित है कि जब पृथ्वी पर कलयुग अपने 5 हजार साल पूरे कर लेगा तो केवल पाप का साम्राज्य होगा। इस समय भगवान के सच्चे भक्तों का अकाल पड़ जायेगा। लोग लालच से भर जायेंगे और हर समय पाप करेंगे। केदार घाटी में नर और नारायण नाम के दो पहाड़ हैं। नर और नारायण ऋषि को भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक माना जाता है, यह उनकी ही तपो भूमि है।

भविष्य में बंद हो जायेगा बद्रीनाथ का रास्ता:

इन्ही ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव केदारनाथ में प्रकट हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे, उस दिन बद्रीनाथ धाम का रास्ता बंद हो जायेगा। इसके बाद से भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे। पुराणों में यह भी वर्णित है कि आने वाले समय में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम विलुप्त हो जायेंगे और वर्षों बाद भविष्यबद्री नामक नए धाम की उत्पत्ति होगी।

कुछ समय पहले उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा के बारे में तो आप जानते ही होंगे, यह उस बात का संकेत थी। मनुष्य आज के समय में विकास के नाम पर तीर्थ स्थलों को विनाश की तरफ ढ़केल रहा है और तीर्थों को मौज-मस्ती की जगह समझकर वहां गलत काम करने लगा है। इसका परिणाम तो भुगतना ही पड़ेगा। ऐसे ही गंगा को स्वर्ग की नदी कहा जाता है और गंगा को साफ-सुथरा रखने के बारे में कहा गया है। लेकिन आज गंगा की क्या स्थिति है, किसी से छिपी नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि आने वाले समय में गंगा पुनः स्वर्ग चली जाएंगी।

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