राजनीति

अजय सिंह बिष्ट इस तरह संन्यासी से बने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघर्षों से गुजरी है जिंदगी

दिल्ली में बीजेपी नेताओं की मुलाकात इस समय सुर्ख़ियों में है. कयास लगाए जा रहे है कि जल्द ही यूपी में कुछ बड़ा होने वाला है. देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में बदलाव के समीकरण साफ़ नज़र आ रहे है. उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दो दिन से दिल्ली में ठहरे हुए है. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी उन्होंने मुलाकात की है. ऐसे में आने वाल समय में यूपी में विधानसभा चुनाव भी होने वाले है. कोरोना के कारण राज्य और पार्टी की छवि को जो धक्का लगा है. उससे पार्टी आलाकमान काफी नाराज़ है.

yogi adityanath

उसके बाद पूर्वांचल बनने की अटकलों को लेकर योगी की अलग राय है. इसके साथ ही सीएम कई कारणों से सुर्ख़ियों में बने हुए है. सबसे पहले नरेंद्र मोदी का योगी के जन्मदिन पर उन्हें बधाई न देना एक मुद्दा बना. इसके साथ ही सरकारी पोस्टर्स से मोदी का चेहरा भी हटाया गया. वहीं योगी अपने अब तक के सफर में अपनी हिंदुत्ववादी छवि, विवादास्पद बयानबाजी के कारण कई बार विवादों में रह चुके है. वर्ष 2017 में बीजेपी ने सीएम पद के लिए योगी के नाम की घोषणा की थी, तो कई लोगों के लिए ये चौंकाने वाला फैसला था.

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बता दें कि पूर्वांचल में योगी का दबदबा रहा है. पूर्वांचल के कारण ही योगी और बीजेपी के बीच पहले भी टकराव होता रहा है. यूपी सीएम कई बार चुनावों में बीजेपी प्रत्याशियों के सामने खड़े हिंदू महासभा और हिंदू युवावाहिनी के उम्मीदवारों को अपना समर्थन दे चुके है.

ऐसी है दिनचर्या

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योगी गोरखपुर आश्रम में रहा करते थे. योगी हर दिन सुबह 400 गायों को खुद गुड़ खिलाते थे. उनकी दिनचर्या तड़के 3 बजे शुरू होती है. 3 से 5 के बीच योग और प्रार्थना करते हैं. इसके बाद सीएम सुबह जनता दरबार में लोगों की समस्याएं सुनते हैं. योगी उत्तराखंड में उत्तरकाशी में एक गांव मशालगांव में पैदा हुआ थे. उनके पिता फॉरेस्ट रेंजर और मां गृहिणी थी.

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कॉलेज के दिनों में वह एबीवीपी के साथ जुड़कर छात्र राजनीति से जुड़ गए. इसी दौरान उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन में रुचि लेना शुरू कर दिया. 1993 की शुरुआत में जब राममंदिर आंदोलन अपने चरम पर था तो अजय सिंह गोरखनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए और वहां महंत अवेद्यनाथ से मिले. इस मुलाकात के दौरान महंत ने अजय से गोरखपुर मठ में उनका शिष्य बनने के लिए कहा. इसके बाद अजय 1993 में अपने परिवार को बिना कुछ कहे गोरखपुर पहुंच गए. 15 फरवरी 1994 को अजय ने दीक्षा ली और योगी आदित्यनाथ बन गए. इसके बाद 2014 में जब उनके गुरु की मौत हुई तो योगी मंदिर के मुख्य पुजारी बन गए.

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इसके बाद 1998 में 26 साल की उम्र में योगी गोरखपुर के सांसद बने. इसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते रहे. पूर्वांचल में वह बीजेपी के लिए स्टार प्रचारक के रूप में जाने जाते है. 2002 विस चुनावों में उन्होंने बीजेपी के खिलाफ हिंदू महासभा के प्रत्याशी को उतारने की घोषणा की थी. महिला आरक्षण विधयेक पर भी योगी बीजेपी के रुख के खिलाफ थे.

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जब इन विवाद में नाम आया
2007 में योगी पर दंगे भड़काने का भी आरोप लगा था, इस मामले में वह 11 दिन जेल में भी रहे थे. उनके विवादित बयानों में ‘सूर्य नमस्कार का विरोध करने वाले भारत छोड़ें आदि शामिल है.

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