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केजरीवाल पर बरसे रविशंकर प्रसाद, कहा-ऑक्सीजन तो पहुंचाई नहीं, घर-घर राशन देने की करते हैं बात

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने निशाना साधा है और घर-घर जाकर राशन देने वाली दिल्ली सरकार की योजना पर खुलकर बात की है। आज रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अरविंद केजरीवाल हर घर जाकर अन्न देने की बात कर रहे हैं। वो ऑक्सीजन तो पहुंचा नहीं सके, मोहल्ला क्लीनिक से दवा तो पहुंचा नहीं सके। हर घर अन्न भी एक जुमला है।

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दिल्ली केजरीवाल सरकार की राशन की होम डिलीवरी वाली योजना पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दिल्ली सरकार राशन माफियाओं के कंट्रोल में है। देश के राज्यों और केंद्र ​शासित प्रदेशों ने वन नेशन वन राशन कार्ड लागू किया। सिर्फ तीन प्रदेशों असम, पश्चिम बंगाल और दिल्ली ने इसे लागू नहीं किया। अरविंद केजरीवाल आपने दिल्ली में वन नेशन वन राशन कार्ड लागू क्यों नहीं किया। आपको क्या परेशानी है?

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि ये होम डिलीवरी देखने में बहुत अच्छी लगती है। लेकिन इसके थोड़ा अंदर जाओ तो इसमें स्कैम के कितने गोते लगेंगे ये समझ में आ जाएगा। आप अपना प्रस्ताव भेजें या भारत सरकार से जो अनाज जाता है। उसी पर खेल खेलेंगे। दिल्ली की राशन की दुकानों में अप्रैल 2018 से अब तक पीओएस मशीन का प्रमाणीकरण शुरु क्यों नहीं हुआ? अरविंद केजरीवाल जी एससी-एसटी वर्ग की चिंता नहीं करते हैं। प्रवासी मजदूरों की चिंता भी नहीं करते हैं, गरीबों की पात्रता की भी चिंता नहीं करते हैं।

रविशंकर प्रसाद के अनुसार वन नेशन, वन राशन कार्ड भारत सरकार द्वारा शुरू की गई बहुत महत्वपूर्ण योजना है। देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना चल रही है। इस योजना के तहत भारत सरकार देश भर में 2 रुपये प्रति किलो गेहूं, 3 रुपये प्रति किलो चावल देती है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पिछले साल की तरह इस बार भी नवंबर तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। चावल का खर्चा 37 रुपये प्रति किलो होता है और गेहूं का 27 रुपये प्रति किलो होता है। भारत सरकार सब्सिडी देकर प्रदेशों को राशन की दुकानों के माध्यम से बांटने के लिए अनाज देती है। भारत सरकार सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये इसमें खर्च करती है। तक इस पर 28 करोड़ पोर्टेबल ट्रांजेक्शन हुए हैं।

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रविशंकर ने कहा कि देश में 86 फीसद राशन पॉस मशीन से ही दिया जा रहा। जबकि कई प्रदेशों में 99 फीसद तक राशन इसी प्रणाली से दिया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने जनवरी 2018 में पॉस का काम शुरू किया था। लेकिन इसे अप्रैल में रोक दिया गया। हैरानी की बात है कि इस दौरान 4 लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए थे। दिल्ली सरकार से जब इसका कारण पूछा गया। तो जवाब मिला कि टेक्नोलॉजी काम नहीं करती है। रविशंकर ने कहा कि कश्मीर से लेकर नागालैंड और हिमाचल व उत्तराखंड में इस तकनीक से राशन दिया जा रहा है। जबकि देश की राजधानी में तकनीक का बहाना बनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार घर-घर राशन योजना को लाना चाहती है। लेकिन इस योजना को केंद्र सरकार ने रोक दिया है। बीजेपी का कहना है कि इस योजना के तहत बड़ा घोटाला होने जा रहा था। जिसे रोका गया है।

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