अध्यात्म

क्या आप जानते हैं की महिलायें श्मशान घाट क्यों नहीं जाती, जानिये यहां …!

श्मशान घाट (Shamshan Ghat)

श्मशान घाट (Shamshan Ghat) वह स्थान है जहाँ मृत इंसान का अंतिम संस्कार किया जाता है. ज़्यादातर श्मशान घाट नदी के किनारे बने होते है. आपको बता दें कि श्मशान की अग्नि बहुत खराब होती है. शास्त्र के अनुसार आग 27 प्रकार की होती है. चिता की अग्नि सबसे अलग होती है. श्मशान घाट में कोई भी पवित्र और मांगलिक कार्य नही किया जा सकता है. श्मशान में भगवान शिव ध्यानमग्न रहते है. शास्त्रों के अनुसार श्मशान घाट शहर से दूर होने चाहिए ताकि अपवित्र धूल और नकारात्मक उर्जा घर में ना घुस पाए.

कहा जाता है कि श्मशान में भूत प्रेत और आत्माओं का वास होता है. इसलिए रात के समय श्मशान घाट के पास से नहीं गुज़रना चाहिए. ऐसी भी मान्यताएँ है कि जब आसमान में चाँद दिखाई दे तब से सूर्य उदय होने तक किसी भी जीवित व्यक्ति को श्मशान के आसपास नहीं जाना चाहिए. हिंदू धर्म के शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति को दिन के समय भी श्मशान घाट में नही जाना चाहिए.

जाने महिलाओं को क्यों नहीं है श्मशान घाट (Shamshan Ghat) जाने की अनुमति

हिंदू धर्म में कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जैसे महिलाओं के श्मशान घाट न जाने की वजहें. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कुछ जगहों पर सिर्फ पुरुष ही जा सकते हैं या कुछ काम सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं। इन कामों में महिलाओं का भाग लेना बिल्कुल मना है। जैसा कि हम जानते हैं कि हिंदू धर्म में नारियल पुरुष फोड़ते हैं। महिलाएं नारियल नहीं फोड़ सकती हैं। उसी तरह अंतिम संस्कार करने के लिए जब लोग श्मशान घाट (Shamshan Ghat) जाते हैं तो वहां पर सिर्फ पुरुष जा सकते हैं महिलाएं नहीं जा सकती हैं।

हम कई बार सोचते है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि महिलाओं को श्मशान घाट नहीं जाने दिया जाता है। इसके पीछे कई सत्य हैं। लेकिन वह सिर्फ ऐसे ही माने जा रहे हैं पर आज हम आपको ऐसे तथ्य के बारे में बताएंगे। जिसका आज से नहीं बल्कि सदियों से पालन होता आ रहा है। तो चलिए जानते हैं कि महिलाओं को श्मशान घाट (Shamshan Ghat) क्यों नहीं जाने दिया जाता है।

महिलाओं के श्मशान घाट ना जाने की वजहें :

1- हिंदू धर्म के लोग जब किसी के अंतिम संस्कार से आते हैं या इसमें शामिल होते हैं तो उसके हिसाब से उन लोगों को अपने बाल मुंडवाने पड़ते हैं, और यह सब बात हम बखूबी जानते हैं कि महिलाओं को बाल मुंडवाने की इजाजत नहीं है।

2- एक औरत का दिल पुरुष के दिल से ज्यादा कोमल और नरम होता है। इसीलिए वह किसी का दुख नहीं देख पाती। अगर श्मशान घाट (Shamshan Ghat) पर कोई रोता है तो जिस इंसान का दाह संस्कार हो रहा है उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। महिलाएं किसी को जलते हुए देखें और वो रोएं नहां, ऐसा हो ही नहीं सकता। क्योंकि उनके लिए किसी इंसान की चोट देखना भी बहुत मुश्किल काम होता है।

3- महिलाओं को इसलिए भी शमशान घाट नहीं जाने दिया जाता है क्योंकि महिलाओं का दिल बहुत ही कोमल होता है। वह मृत्यु के बाद इंसान को चिता पर जलते हुए देखें और कहीं डर गईं। तो उनके लिए बहुत बड़ी समस्या बन जाएगी। इसलिए भी उनको श्मशान घाट नहीं जाने दिया जाता है।

4- महिलाओं के श्मशान घाट ना जाने की वजहें में सबसे बड़ी वजह यह है कि जब लोग श्मशान घाट (Shamshan Ghat) से मृत व्यक्ति का दाह संस्कार करके आते हैं तो घर में पुरुषों के पैर धुलाने और स्नान करवाने के लिए महिला का घर में होना बहुत जरूरी है। ताकि पुरुषों को कोई सामान घर में छूने ना दिया जाए, और बिना छुए उनको पानी वगैरा मिल जाए। जिससे वह स्नान कर सकें।

5- यह बात तो हम सब जानते हैं कि श्मशान घाट में आत्माएं वास करती है, और ज्यादातर आत्मा महिलाओं को ही अपना निशाना बनाती हैं। इसलिए भी श्मशान घाट (Shamshan Ghat) में महिलाओं को नहीं जाने दिया जाता है।

बस इन्ही पांच कारणों की वजह से महिलाओं को श्मशान घाट नही जाने दिया जाता है। वहां उनका जाना वर्जित है क्योंकि यहां जितनी भी दलीलें दी गई हैं वो धार्मिक आस्थाओं से सही हैं, और अगर आप लॉजिक के हिसाब से देखें तो भी वह सही नजर आती हैं।

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