अध्यात्म

वृषभ संक्रांति के दौरान ये कार्य करने से होती है पुण्यफल की प्राप्ति, जानें तिथि व महत्व

14 मई शुक्रवार के दिन वृषभ संक्रांति आ रही है। वृषभ संक्रांति को बेहद ही खास माना जाता है और ये मकर संक्रांति के समान ही होती है। वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ में ही इस दिन पूजा-पाठ, जप, तप और दान का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों में वृषभ संक्रांति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संक्रांति के दिन किसी पवित्र नदी व जलकुंड में नहाना उत्तम फल देता है और ऐसा करने से तीर्थस्थलों के दर्शन करने के समान फल मिलता है। जो लोग संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, उन लोगों को पापों से मुक्ति मिल जाती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव एक मास में एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं तो इसे संक्रांति कहते हैं। जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे वृषभ संक्रांति कहते हैं। सूर्य के इस राशि में प्रवेश करने से मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं और गर्मी अधिक हो जाती है।

जब सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन ये संक्रांति मनाई जाती है। पंडितों के अनुसार सूर्य देव 14 मई को मेष राशि से वृष राशि में प्रवेश करेंगे। जिसके साथ ही 14 मई को वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी। इस राशि में सूर्य देव 15 जून 2021 तक विराजमान रहने वाले हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा, मान सम्मान, उच्च पद आदि का कारक माना गया है और इस दिन सूर्य देव का पूजन करने से लोगों को इनका आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।

वृषभ संक्रांति का महत्व

वृषभ संक्रांति को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। रोगों से सूर्य देव रक्षा करते हैं और मन जाहिए चीज मिल जाती है।

इस महीने प्यासे लोगों को पानी पिलाना पुण्य के सामना होता है। प्यासे लोगों को पानी पिलाने से व्यक्ति को यज्ञ कराने के समतुल्य पुण्यफल मिलता है। इसलिए आप प्यासे लोगों को पानी पिलाने व घर के बाहर प्याऊ भी रखें।

वृषभ संक्रांति के दिन इस तरह से करें पूजा

सुबह उठाकर घर की सफाई कर पवित्र जल से स्नान करें। नहाने के पानी में अगर गंगा जल मिलाया जाए तो वो पवित्र हो जाता है। इसलिए आप पानी में गंगा जल मिला लें।

इस दिन सूर्य देव का पूजन जरूर करें और इनका पूजा करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का एक जाप करें। इस मंत्र को आप 108 बार पढ़ें। मंत्र का जाप करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और अर्घ्य देते समय परिक्रमा जरूर लें।

अर्घ्य देने के बाद गरीबों लोगों को वस्त्र वो खाने की चीजों का दान कर दें।

मौसम हो जाता है गर्म

वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आते हैं। इस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं। इन 15 दिनों के शुरूआती के नौ दिन तक प्रचंड गर्मी पड़ती है। इन नौ दिनों को ‘नवतपा’ कहा जाता है। कहा जाता है कि अगर इन नौ दिनों में वर्षा न हो और न ही ठंठी हवा चले। तो आने वाले दिनों में खूब अच्छी बारिश होती है।

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