अध्यात्म

इस वजह से शिव जी ने कर दिया था विष्णु जी के पुत्रों का अंत, पढ़ें ये पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के पुत्रों का संहार भगवान शिव के हाथों हुआ है। भगवान शिव ने तीनों लोकों को दानवों से बचाने के लिए विष्णु जी के पुत्रों का वध कर दिया था। इस संदर्भ से जुड़ी कथा का जिक्र शिव पुराण में मिलती है। कथा के अनुसार तीनों लोक को दानवों से बचाने के लिए भोलेनाथ ने बैल का अवतार धारण किया था और भगवान विष्‍णु के पुत्रों का संहार किया था। जिसके कारण विष्णु जी काफी क्रोधित हो गए थे और इन्होंने भोलेनाथ से युद्ध कर लिया था।

इस प्रकार है कथा

कथा के अनुसार भगवान विष्णु दानवों का पीछा करते हुए पाताल लोक पहुंच गए थे। यहां जाकर विष्णु जी ने देखा की कई सारी अप्सराओं को दानवों ने कैदी बनाकर रखा है। ये सभी अप्सारएं विष्णु जी की भक्त हुआ करती थी और उनकी रोज पूजा करती थी। अप्सराओं को इन हालतों में देखकर विष्णु जी ने तुरंत इन्हें कैद से रिहा कर दिया। कैद से रिहा होने के बाद अप्सराओं ने विष्णु जी से विवाह करनी की इच्छा जाहिर की। विष्णु जी मना नहीं कर सके और उन्होंने सभी अप्सराओं से विवाह कर लिया।

कथा के अनुसार विवाह करने के बाद विष्णु जी पाताल लोक में ही रुक गए और काफी दिनों बाद विष्णुलोक वापस आए। इन अप्‍सराओं ने विष्‍णु जी के पुत्रों का जन्‍म दिया। लेकिन सभी में दानवीय गुण थे। विष्णु जी के पुत्रों ने बड़ा होकर तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया। इन्होंने देवता-मनुष्‍य को खूब परेशान किया। विष्णु जी के पुत्रों से छुटकारा पाने के लिए देवता भोलेनाथ की शरण में पहुंचे। इन्होंने भोलेनाथ को बताया कि किस तरह से विष्णु दी के पुत्रों ने आतंक मचा रखा है।

देवताओं को विष्णु जी के पुत्रों से बचाने के लिए शिव जी ने बैल ( वृषभ) अवतार धारण किया। ये अवतार धारण कर ये पाताल लोक पहुंच गए। यहां पर इन्होंने एक-एक करके भगवान विष्‍णु के सभी पुत्रों का संहार कर दिया और इस तरह तीनों लोकों को विष्‍णु के दानवीय पुत्रों के आतंक से बचाया गया। हालांकि जब इस बात की जानकारी विष्णु जी को लगी तो उन्हें भोलेनाथ पर काफी गुस्सा आए वो क्रोधित हो गए।

विष्णु जी तुंरत वृषभ से लड़ने पहुंच गए। लंबे समय तक दोनों देवताओं के बीच में युद्ध चलता रहा। लेकिन इस युद्ध का कोई अंत नहीं हुआ। तब अप्‍सराओं ने बीच में आकर इस युद्ध को रोकने का प्रयास किया। जिसमें में कामयाब हो गई। इसके बाद इन्‍होंने शिव जी कैलश चले गए और विष्‍णु जी अपने लोक लौट गए।

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