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गोलियां खाने के बाद जान बचाने के लिए लोगों के दरवाज़े पीटते रहे गुलशन कुमार, किसी ने नहीं की मदद

गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) एक ऐसा नाम जिसे आज भी पूरी इंडसट्री जानती है. गुलशन कुमार ने म्यूजिक की दुनिया में क्रांति ला दी थी. गुलशन कुमार का जन्म दिल्ली के पंजाबी परिवार में हुआ था. उनके पिता चंद्र भान दुआ की दिल्ली में एक जूस की दुकान हुआ करती थी. गुलशन बचपन में अपने पिता के साथ उस दुकान पर बैठा करते थे. यही से उन्होंने व्यापार की बारीकियां सीखी. गुलशन कुमार ने महंगे-महंगे सांग्स के राइट्स को आम जनता के बीच लाकर रख दिया. गुलशन का जन्म भारत की राजधानी दिल्ली में एक पंजाबी अरोड़ा परिवार में हुआ था. उनका प्रारंभिक नाम गुलशन दुआ था.

गुलशन कुमार ने दिल्ली में ही कैसेट्स की दुकान खोली जहां वो सस्ते दाम में गानों की कैसेट्स बेचा करते थे. गुलशन कुमार का ये काम देखते ही देखते आगे बढ़ गया और उन्होंने नोएडा में ‘टी सीरीज’ नाम से अपनी म्यूजिक कंपनी कड़ी कर दी. गुलशन कुमार ने कई नए लोगों को भी काम दिया. उन्होंने सोनू निगम, अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू जैसे सिंगर्स को दुनिया से रूबरू करवाया.

गुलशन कुमार की जिंदगी में सब कुछ अच्छा ही चल रहा था. उन्होंने कम ही समय में बुलंदियों को छु लिया था. लेकिन इसी बीच मुंबई की सड़क पर एक दिन ऐसा हादसा हुआ जिसने सभी को चौका कर रख दिया था. ये बात है वर्ष 1997 में 12 अगस्त के दिन की. मुंबई के एक मंदिर के पास जब वो पूजा कर के अपने घर लौट रहे थे इसी दौरान कुछ गुंडों ने उन्हें बीच सड़क पर गोली मार दी थी. गुलशन कुमार को बड़ी ही बेरहमी से मारा गया था. उन पर 16 राउंड फायरिंग की गई थी. उनकी गर्दन और पीठ में 16 गोलियां पाई गई थी.

गुलशन कुमार बचने के लिए आस पास दौड़ते रहे-भागते रहे लोगों के घरों के दरवाजे पीटते रहे. लेकिन किसी ने उनकी मदद के लिए दरवाजा नहीं खोला. उस समय गुलशन कुमार के साथ सिर्फ उनका ड्राइवर ही मौके पर मौजूद था. उनका ड्राइवर भी घायल हो चुका था. कहा जाता है कि उनकी हत्या के पीछे अंडरवर्ल्ड का हाथ था. गुलशन कुमार ने जबरन वसूली की मांग को मानने से इंकार कर दिया था इसलिए उन्हें मार दिया गया था.

इस मामले में जानकारी के मुताबिक अबू सलेम के कहने पर दो शार्प शूटर दाऊद मर्चेंट और विनोद जगताप ने गुलशन कुमार की हत्या को अंजाम दिया था. वर्ष 2001 जनवरी 9 के दिन विनोद जगताप ने कुबूल कर लिया था कि उसने गुलशन कुमार को गोली मारी है. इसलिए वर्ष 2002 को उसे आजीवन कारावास की सजा दे दी गई थी. वहीं दाऊद मर्चेंट को भी इस मामले में उम्रकैद की सजा दी गई थी.

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने हत्या की योजना के लिए उस समय की मशहूर म्यूजिक जोड़ी नदीम-श्रवण के नदीम को अभियुक्त बनाया. नदीम भागकर इंग्लैंड चले गए थे और वहां की नागरिकता भी ले ली थी. अभी कुछ दिनों पहले ही इस जोड़ी के श्रवण राठौर की कोरोना से मौत हो गई थी. जिस पर नदीम ने भी अपना दुख जताया था.

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