स्वास्थ्य

स्‍पाइसी फूड आपके शरीर को नुकसान के साथ फायदा भी देता है, चौकिए मत पूरी खबर पढ़िए…

अब तक हम अपने बड़े बुजुर्गो से यही सीखते सुनते आ रहे है कि हमें हमेशा फीका भोजन ही करना चाहिए. ज्यादा स्पाइसी फ़ूड नहीं खाना चाहिए. मसालेदार खाना या तीखा खाना नुकसानदेह होता है. हमने टीवी, अखबारों में भी यही पढ़ा है कि मसाले वाला खाना खाकर ही हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं. हम लोग इन बातों पर अमल भी कर लेते है. परन्तु जब भी हम घर से बाहर जाते है और हमारे सामने तीखी मनपसंद चाट, चटपटे गोल गप्पे, समोसे, कचोरी या मसालेदार कोई चीज़ आती है तो हम अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाते है और छटपट उस चीज़ को खा लेते है.

इन सब चीज़ों को खाने के बाद या खाने के पहले हमारे मन में यह विचार अक्सर आता रहता है कि बस इस बार थोड़ा सा खा लूँ फिर नहीं खाऊंगा. लेकिन हम अब आपके लिए एक खुश खबरी लेकर आए है. आपने वह तो सुना ही होगा कि हर काम सीमा में किया जाए तो अच्छा. दरअसल सीमित मात्रा में अगर आप स्पाइसी खाना खाते है तो यह आपके शरीर को नुक्सान नहीं बल्कि फायदा देता है.

विज्ञान और हमारा आयुर्वेद भी इस बात को मानता है. अगर आपके भोजन में सही मात्रा में इलाइची, दालचीनी, हल्दी, लहसुन, अदरक और मिर्च आदि मसाले डले हुए है तो ये आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. हम आपको बताते है कि स्‍पाइसी फूड खाने के क्‍या क्‍या फायदे हैं.

दालचीनी, जीरा, हल्दी जैसे मसालों में एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज मोजूद रहती है. यह मसाले शरीर में मोजूद बैड बैक्टीरिया से लड़कर उन्हें शरीर से बाहर निकालने में काफी मदद करते हैं. इनके नियमित सयमित सेवन से शरीर में किसी तरह का इंफेक्शन नहीं होता और बीमारियों से आप बच सकते है.

हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाली तीखी मिर्ची में कैप्सेसिन (Capsaesin) नाम का एक ऐक्टिव कॉम्पोनेंट रहता है जो कैंसर सेल्‍स को धीमा करने और उन्हें समाप्त करने में मददगार साबित होता है. इससे कैंसर को बढ़ने और फैलने से आसानी से रोका जा सकता है. एक शोध के अनुआर चूहों पर एक स्टडी के समय पाया गया कि कैप्‍सेसिन ने प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोक दिया है. साथ ही इससे हेल्‍दी कोशिकाओं को किसी तरह का कोई नुकसान भी नहीं हुआ है.

आपको बता दें कि लहसुन, अदरक, हल्दी जैसे मसालों में एंटीइन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज मौजूद रहती हैं. इन मसालों का उपयोग आयुर्वेद में आर्थराइटिस (Arthritis), सिरदर्द, जी मिचलाना और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में भी काफी समय से किया जा रहा है. ये भारतीय मसाले इन्फ्लेमेशन से लड़ते हैं और मानव शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते है.

तीखा और मसालेदार सब्जी व खाना खाने से शरीर में सेरोटोनिन यानी फील गुड हार्मोन बाहर निकलता है. इससे आपका स्ट्रेस और डिप्रेशन कंट्रोल में रहता है. ये हमारे शुगर लेवल को भी सामान्य बनाये रखने में सहायक होते है. हरी, लाल और काली मिर्च, हल्दी, दालचीनी आदि मसालों को खाने से शरीर के मेटाबॉलिक रेट में इज़ाफ़ा होता है. इससे भूख कम लगती है जिस कारण यह वजन कम करने में भी काफी मददगार होता है.

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