लंकेश भक्त मंडल ने लिखा पीएम मोदी को पत्र, कहा- राम मंदिर में लगवाएं रावण की भव्य प्रतिमा

अयोध्या में राम मंदिर बनने का कार्य शुरू हो गया है और उम्मीद की जा रही है कि कुछ ही सालों में ये भव्य मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। वहीं इस मंदिर को लेकर मथुरा के लंकेश भक्त मंडल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा गया है। इस पत्र में मथुरा के लंकेश भक्त मंडल ने पीएम और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष से कहा कि वो राम मंदिर में रावण की मूर्ति भी लगा दें। इन्होंने मांग की है कि अयोध्या में बनाए जा रहे भगवान श्रीराम के मंदिर में महाराज दशानन यानी रावण की प्रतिमा लगाई जाए। साथ में ही इन्होंने ये प्रतिमा लगाने का खर्च उठाने की बात भी कही है।

लंलंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारियों ने गुरुवार को बैठक कर इस विषय पर चर्चा की। जिसके बाद लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने एक पत्र लिखा। बैठक में बीडी शमा, कुलदीप अवस्थी, ब्रजेश सारस्वत, संजय सारस्वत, अजय सारस्वत, संतोष सारस्वत, गजेंद्र सारस्वत, देवेंद्र सारस्वत, प्रमोद सारस्वत, मुकेश सारस्वत प्रधान, राकेश सारस्वत, अनिल सारस्वत, कपिल सारस्वत, हरिओम सारस्वत आदि थे।

पत्र में कहा गया है कि लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने सेतु बंधु रामेश्वरम पर महाराज दशानन से महादेव की पूजा कराई थी। उस समय भगवान श्रीराम की ओर से जामवंत लंका गए थे। उन्होंने प्रभु राम की ओर से लंकेश को आचार्य बनने का निमंत्रण दिया था। जिसे लंकेश ने स्वीकार किया था। जानकीजी को साथ लाकर राम जी से युद्ध में विजय प्राप्त करने की पूजा-अर्चना रामेश्वरम में दशानन ने कराई थी।

पत्र में आगे कहा गया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के बनाए जा रहे मंदिर में भगवान श्रीराम के आचार्य दशानन की भी भव्य प्रतिमा होनी चाहिए। जिस तरह से भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा लगाई जा रही है। उसी तरह से इनकी मूर्ति भी लगाई जाए। इन्होंने कहा है कि सभी लंकेश भक्त राम मंदिर निर्माण में अपना दान देने के साथ-साथ लंकेश की भव्य प्रतिमा के लिए भी दान देंगे। हालांकि इस पत्र का अभी तक कोई भी जवाब पीएम व श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष की ओर से दिया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 5 अगस्त को अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की भूमि पूजा की गई थी। इस दौरान पीएम मोदी ने मंदिर की नींव रखी थी। इस मंदिर को बनाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से कारीगरों को बुलाया गया है। साथ में ही मंदिर को बनाने के लिए पवित्र नदियों के जल और मिट्टी का भी प्रयोग किया जा रहा है। ये मंदिर कुछ ही सालों में बनकर तैयार हो जाएगा।