प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को धनतेरस की बधाई, आज देश को देंगे यह उपहार

हिंदू धर्म में दीपावली के त्यौहार का बहुत महत्व है। धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दिवाली त्यौहार की शुरुआत हो चुकी है। धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। हिंदू रीति-रिवाजों में इसी दिन से दीपावली का पर्व शुरू हो जाता है। ऐसा बताया जाता है कि इस दिन अगर धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाए तो इससे जीवन में धन की कमी नहीं होती है। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी जी सोने से भरा कलश लेकर प्रकट हुई थीं। इस दिन आयुर्वेद के देवता धनवंतरी की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सभी देशवासियों को धनतेरस की बधाई दी है। साथ ही यह देश को खास उपहार भी देंगे।

PM नरेंद्र मोदी ने दी धनतेरस की बधाई


धनतेरस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देशवासियों को धनतेरस की बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए यह लिखा है कि “धनतेरस की आप सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई। भगवान धन्वंतरी हर किसी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आएं।

पीएम नरेंद्र मोदी आयुर्वेद संस्थानों का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आज दो आयुर्वेद संस्थानों का उद्घाटन भी करने वाले हैं। आपको बता दें कि आज का दिन आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह पांचवा आयुर्वेद दिवस है। आयुष मंत्रालय के अनुसार आज धनतेरस और आयुर्वेद दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जामनगर आयुर्वेद अध्यापन एवं अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) और जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) का उद्घाटन करेंगे। यह दोनों संस्थान देश में आयुर्वेद के प्रतिष्ठित संस्थान हैं। आईटीआरए को संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संसाधन का दर्जा दिया गया है जबकि आईएनए को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संघ विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।

आपको बता दें कि आयुष मंत्रालय वर्ष 2016 से हर साल धनवंतरी जयंती यानी धनतेरस के अवसर पर आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता आ रहा है। अभी हाल ही में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्वीकृत किया गया जामनगर का संस्थान विश्वस्तरीय के स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में उभरने के लिए तैयार है। आईटीआरए गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के चार आयुर्वेदिक संस्थानों को मिलकर बनाया गया है

जानिए इन दोनों संस्थानों से क्या होने वाला है फायदा

खबरों के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि 21वीं सदी में आयुर्वेद के विकास में यह दोनों ही संस्थान बहुत अहम भूमिका निभाने वाली हैं। इन संस्थानों में कई बड़ी-बड़ी गंभीर बीमारियों के लिए आधुनिक आयुर्वेद और पारंपरिक दवाइयों का अध्ययन किया जाने वाला है, जिसकी वजह से आयुर्वेद शिक्षा के स्टैंडर्ड को अपग्रेड करने में भी सहायता मिलने वाली है। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि कोरोना महामारी के बीच आयुर्वेद की भूमिका काफी अधिक बढ़ चुकी है। आयुष मंत्रालय ने इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कई आयुर्वेद उपायों के बारे में बताया। पिछले तीन-चार सालों में आयुर्वेद के क्षेत्र में मोदी सरकार ने काफी कार्य किए हैं।