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बाबरी विध्वंस केस में कोर्ट ने किया सभी आरोपी को बरी, CBI ने माना पूर्वनियोजित नहीं थी ये घटना

बाबरी विवादित ढांचें पर 28 साल बाद कोर्ट का फैसला आ गया है और कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया है। दरअसल इस मामले में कुल 48 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिनमें से 16 की मौत हो चुकी है और बचे हुए लोगों को आज कोर्ट ने बेकसूर बताया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस के यादव ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि घटना पूर्वनियोजित नहीं थी। 6 दिसंबर, 1992 की घटना में साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है। सीबीआई की ओर से कोर्ट में जो वीडियो दाखिल की गई थी। उसे कोर्ट ने टैंपर्ड माना है और इस वीडियो को सीलबंद लिफाफे में नहीं जमा किया गया था। जो कुछ हुआ है वो अचानक से हुआ था और आरोपी बनाए गए लोगों का विवादित ढांचा गिराने के मामले से कोई लेना-देना नहीं था। इस ढांचे को अज्ञात लोगों द्वारा गिराया था।

सीबीआई ने कर पाई सबूतों को पेश

सीबीआई द्वारा कोर्ट में आरोपियों के गुनाह को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके। जिसके कारण कोर्ट ने सभी आरोपियों को भरी किया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अखबारों में लिखी बातों को सबूत नहीं माना जा सकता है। आपको बता दें कि इस केस में अभियोजन पक्ष ने 351 लोगों को गवाह बनाया था और केस में बनाए गए अधकितर गवाह प्रिंट-इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार व फोटोग्राफर थे। ये केस 28 सालों से चल रहा था और आज इसका फैसला आया है।

ये लोग थे आरोपी

इस केस में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमरनाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे।

आडवाणी ने फैसले पर जताई खुशी

कोर्ट के फैसले पर आडवाणी ने वीडियो मैसेज जारी कर खुशी जताई और कहा आज जो कोर्ट का निर्णय आया, वो अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सबके लिए खुशी का दिन है। वहीं इस केस के आरोपी मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आज साबित हो गया है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कोई साजिश नहीं हुई थी। तब हमारा कार्यक्रम और रैलियां किसी षड्यंत्र का हिस्सा नहीं थीं। हम खुश हैं। सभी को राम मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर जताई खुशी


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि, लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कल्याण सिंह, डा. मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूँ। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।

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