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चीन हमारे आंतरिक मामलों में दखल ना दे, दलाई लामा हमारे धार्मिक नेता हैं, राजनैतिक व्यक्ति नहीं: किरेन रिजीजू!

तिब्बत के धर्मगुरु और भारत में शरणार्थी दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा का विरोध कर रहे चीन को भारत ने दो टूक जवाब दिया है, भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह उसी तरह है जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल भारत का हिस्सा हैं.

अरुणाचल प्रदेश पूरी तरह से भारत का अभिन्न अंग है :

हां! मैकमोहन रेखा को लेकर थोड़ा विवाद जरूर है लेकिन अरुणाचल प्रदेश पूरी तरह से भारत का अभिन्न अंग है. ये बात केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने कही.

उन्होंने चीन को भारत के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देने की हिदायत दी, रिजीजू का बयान चीन की आपत्तियों पर आया है, दरअसल दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर जाने वाले हैं जिसपर लगातार चीन अपना विरोध जता रहा है.

चीन इस मामले में दो बार बयान जारी करके भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को नुकसान पहुंचने की बात कह चुका है. चीन के ऐसे रवैये पर अब भारत ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. गौरतलब है कि भारत दलाई लामा को तिब्बत के धार्मिक नेता के रूप में देखता है और उनका बहुत सम्मान भी करता है जबकि चीन उन्हें एक चरमपंथी नेता के रूप में देखता है. दलाई लामा को लेकर पहले भी चीन विवाद खड़े करता रहा है.

चीन जानबूझकर विवाद खड़ा कर रहा है :

भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि चीन जानबूझकर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर विवाद खड़ा कर रहा है. हालांकि भारत कई बार यह संदेश दे चुका है कि दलाई लामा एक सम्मानित धार्मिक नेता हैं और भारतीय जनता उनके लिए बहुत श्रद्धा और आस्था का भाव रखती है. इसलिए भारत के किसी भी राज्य में उनके जाने या दौरा करने का कोई दूसरा मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए.

एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान किरेन रिजीजू ने कहा कि दलाई लामा की यात्रा हमेशा धार्मिक है वह कोई राजनैतिक व्यक्ति नहीं हैं, चीन उन्हें राजनैतिक व्यक्ति के तौर पर प्रस्तुत करता है. चीन उन्हें अलगाववादी मानता है लेकिन वो हमारे धार्मिक नेता हैं.

इससे पहले साल 2009 में दलाई लामा ने अरुणाचल दौरा किया था तब भी चीन ने बहुत विवाद खड़ा किया था.

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