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पढ़ें यूपी के 5 बड़े गैंगस्टर की कहानी: किसी ने 22 ठाकुरों को मारा, तो एक ने ली CM की सुपारी

उत्तर प्रदेश राज्य हमेशा से ही बड़े अपराधियों का गढ़ रहा है और आज हम आपको इस राज्य के ऐसे ही पांच बड़े अपराधियों की कहानी बताने जा रहे हैं। जिनका नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे और इनके खिलाफ कुछ भी बोलने से पहले सौ बार सोचते थे। इन अपराधियों के द्वारा कई खूंखार वारदातों को अंजाम दिया गया था और इनपर लाखों रुपए का इनाम रखा गया था।

1 .फूलन देवी

फूलन देवी का जन्म साल 1963 में उत्तर प्रदेश के जालोन जिले में हुआ था। फूलन देवी एक खूंखार डकैत थी। 11 साल की आयु में फूलन देवी की शादी 40 साल के एक शख्स के साथ करवा दी गई थी। इस शख्स ने शादी के बाद फूलन देवी पर कई अत्याचार किए और उसका बलात्कार किया। जिससे तंग आकर फूलन देवी भागकर अपने मां बाप के घर आ गई।

फूलन देवी का बचपन केवल दुखों से ही गुजरा था। वहीं इसी दौरान फूलन देवी की मुलाकात एक डाकू गैंग से हुई और यहां से फूलन देवी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। गैंग से जुड़ने के बाद फूलन देवी इनके साथ ही रहने लग गई। वहीं इस गैंग के सरदार बाबू गुज्जर ने एक दिन फूलन देवी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, तब गैंग के अन्य सरदार विक्रम मल्लाह ने फूलन को बचाया और  गुज्जर को गोली मार दी। इस घटना से गैंग के लोग नाराज हो गए और उन्होंने विक्रम को मार दिया। विक्रम को मारने के बाद फूलन के साथ इन लोगों ने 3 हफ्ते तक बलात्कार किया।

इन डाकूओं के चंगुल से आजाद होकर फूलन दूसरे गैंग में शामिल हो गई। फूलन के साथ जो ठाकुरों के गैंग ने किया फूलन उसे भूली नहीं थी। फूलन ने साल 1981 में वहबेहमई गांव लौटकर गांव के 22 ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा कर गोली मार दी। इनमें से 21 की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने फूलन देवी को पकड़ने के लिए दिन रात एक कर दिया। मगर फूलन देवी किसी के हाथ ना लग सकी।

हालांकि यूपी और मध्य प्रदेश की सरकारों ने किसी तरह से फूलन देवी को सरेंडर के लिए राजी किया। फूलन देवी को सरेंडर के लिए राजी करवाने का काम ग्वालियर के पुलिस महानिरीक्षक राजेन्द्र चतुर्वेदी को सौंप गया था। इन्होंने चंबल के बीहड़ों में फूलन देवी से मुलाकात की और 12 घंटे इनसे बातचीत की। जिसके बाद साल 1983 में फूलन देवी ने मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने सरेंडर कर दिया।

फूलन देवी को 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के केस में 11 साल जेल में रहना पड़ा। वहीं फूलन देवी ने साल 1994 में सपा की टिकट पर मिर्जापुर से चुनवा लड़ा और इस चुनाव को जीतकर लोकसभा पहुंच गई। हालांकि साल 2001 में फूलन देवी की हत्या कर दी गई। हीशेखर कपूर ने ‘बैंडिट क्वीन’ नामक एक फिल्म फूलन देवी के जीवन पर बनाई थी जो काफी लोकप्रिय रही थी। ये फिल्म साल 1994 में आई थी।

2. बुंदेलखंड का वीरप्पन

शिव कुमार पटेल उर्फ़ ‘ददुआ’ को बुंदेलखंड के वीरप्पन के नाम से जाना जाता था। ददुआ 1970 के दशक का खूंखार अपराधी थी।इसपर 200 से ज्यादा हत्याओं का आरोप था। लेकिन डर के मारे इन हत्याओं का केस पुलिस ने दर्ज नहीं किया था।

ददुआ ने साल 1982 में अपना एक गैंग बनाया था। 1986 में इसने 9 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं साल 1992 में मडइयन नाम के गांव में तीन लोगों को भी इसने मार दिया था और पूरे गांव को आग के हवाले कर दिया था।

प्रधान, विधायक और सांसद का चुनाव लड़ने के लिए अगर कोई व्यक्ति खड़ा होता था, तो उसे ददुआ को पैसे देने होते थे। उसके बाद ही वो प्रचार कर सकता था। यूपी और मध्य प्रदेश में ददुआ के खिलाफ करीब 400 से अधिक मामले दर्ज थे और उस दौरान यूपी पुलिस ने ददुआ पर 10 लाख रुपए का इनाम रखा था। हालांकि साल 2007 में एसटीएफ की टीम ने ददुआ का एनकाउंटर कर दिया था। कहा जाता है कि ददुआ को तलाश करने में 100 करोड़ से ज्यादा का खर्च किया गया था। फतेहपुर के नरसिंहपुर गांव में डकैत ददुआ की प्रतिमा भी लगाई गई है।

3. निर्भय गुर्जर

निर्भय गुर्जर भी एक डकैत था और इसपर यूपी और मध्य प्रदेश सरकार ने 2.5- 2.5 लाख रुपए का इनाम रखा था। निर्भय गुर्जर के खिलाफ अपहरण और हत्‍या के 200 से अधिक मामले दर्ज थे। 8 नवंबर साल 2005 में ये डकैत पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

इसके गैंग में ज्यादतर लड़कियां ही होती थी और इसने 4 शादियां कर रखी थी। माना जाता है कि एक बार चोरी के आरोप में निर्भय गुर्जर की पुलिस ने खूब पीटा की थी। जिसके कारण ये डाकुओं के एक गैंग में शामिल हो गया था और बाद में इसने अपना ही गैंग बना लिया था।

4. श्रीप्र काश शुक्ला

श्री प्रकाश शुक्‍ला को एक शार्प शूटर और सुपारी किलर के तौर पर जाना जाता था। इसने पूरी यूपी में आतंक मचा रखा था। साल 1993 में एक युवक ने शुक्ला की बहन के साथ छेड़खानी की थी। जिसके बाद इसने युवक की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद ये बैंकॉक भाग गया था। वहीं कुछ समय बाद भारत लौटकर ये सूरजभान गैंग में शामिल हो गया।

इस अपराधी ने साल 1997 में लखनऊ के बाहुबली नेता वीरेन्द्र शाही की हत्या कर दी थी। वहीं 13 जून 1998 को इसने बिहार सरकार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद को भी मार दिया था। इतना ही नहीं इस अपराधी ने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी भी ली थी और ये सुपारी 5 करोड़ की थी। हालांकि 23 सितंबर 1998 को एसटीएफ ने मुठभेड़ में श्री प्रकाश को मार गिराया था।

5. मुन्ना बजरंगी

गैंगस्टर प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी ने 14 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। इस गैंगस्टर ने पड़ोसी के साथ हुए एक मामूली विवाद के बाद 250 रुपए में पिस्टल खरीदकर पड़ोसी की हत्या कर दी थी।

जौनपुर के बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करने के बाद मुन्ना बजरंगी मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था। साल 1996 में मुख्तार अंसारी ने मऊ की सीट से समाजवादी पार्टी की और से चुनाव लड़ा था और विधायक बन गया था। जिसके बाद मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना ने सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार को शुरू किया।

साल 2005 में मुन्ना बजरंगी ने बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी थी। इसने अपने साथियों के साथ मिलकर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर 400 से ज्यादा गोलियां चलाईं थी। इस हत्या के बाद इसपर सात लाख रुपए का इनाम रखा गया था। हालांकि 29 अक्टूबर 2009 को इसे पकड़कर जेल में डाल दिया गया था। साल 2018 में बागपत जेल में गोली मारकर इसकी हत्या कर दी गई थी। मुन्ना बजरंगी ने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 के करीब हत्याएं की थी।

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