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खुन्नस में आकर विकास ने की थी देवेंद्र मिश्रा के शव से बर्बरता, इस वजह से करता था नफरत

कानपुर कांड को हुए आज चार दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक इस केस का मुख्य आरोपी विकास दुबे पुलिस की पहुंच से बाहर है। विकास दुबे की तलाशी में 3 हजार से अधिक पुलिसकर्मी लगे हुए हैं। लेकिन इस शातिर अपराधी का कोई भी सुराग हाथ नहीं लग पाया है। इसी बीच कानपुर मुठभेड़ की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों के सामने ऐसे कई राज खुल रह हैं। जिसने पुलिस महकमे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जो तथ्य सामने आए हैं, वो साफ इस और इशारा करते हैं कि विकास दुबे के इशारों पर ही पुलिस काम करती थी। विकास को बचाने के लिए पुलिसवाले उसके खिलाफ केस ही दर्ज नहीं करते थे।

शहीद सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा को जब अपने महकमे के इन लोगों पर विकास दुबे को बचाने का शक हुआ। तो उन्होंने इस बात की जानकारी तुरंत तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को दी। लेकिन तत्कालीन एसएसपी अनंत देव ने देवेंद्र मिश्रा की बात को अनसुना कर दिया। वहीं विकास को इस बात का अंदाजा लग गया था कि देवेंद्र मिश्रा भ्रष्ट पुलिसवालों में से नहीं है और वो हर हालत में विकास को उसके अपराधों की सजा दिलाकर ही रहेगा।
इस तरह से विकास को बचाते था विनय तिवारी

चौबेपुर के बिकरू गांव निवासी रोली शुक्ला ने विकास दुबे सहित कई लोगों पर केस दर्ज करवाया था। रोली शुक्ला ने विकास दुबे, धर्मेंद्र, शिवम दुबे,अमर दुबे, वैभव दुबे, गोपाल सैनी पर रंगदारी मांगने, गालीगलौज, जान से मारने और मारपीट की धाराओं में 13 मार्च को एफआईआर दर्ज करवाई थी। लेकिन चौबेपुर के एसओ विनय तिवारी ने जांच अधिकारी अजहर से विकास दुबे का नाम केस से बाहर करने को कहा और विकास दुबे बच गया। जैसे की इस बात की जानकारी बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा को लगी तो उन्होंने एसएसपी को पत्र लिख, उन्हें इस घटना की जानकारी दी। लेकिन एसएसपी ने पत्र के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।

राहुल ने करवाया केस दर्ज

विकास दुबे और राहुल नामक एक व्यक्ति के बीच जमीन को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद के कारण विकास दुबे ने राहुल को खूब धमकी दी और परेशान किया। जिसके बाद राहुल ने विकास के खिलाफ चौबेपुर थाने में केस दर्ज करना चाहा। लेकिन विनय तिवारी ने केस दर्ज नहीं किया। बल्कि राहुल को विकास दुबे के घर ले गया। जहां पर विकास के गुंडों ने राहुल को बुरी तरह से मारा।

राहुल ने उसके साथ हुई मारपीट की शिकायत सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा से की। सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा ने विकास के खिलाफ केस दर्ज किया और अधिकारियों से अनुमति लेकर अपनी टीम के साथ विकास को पकड़ने के लिए उसके गांव चले गए। वहीं विकास को पहले से ही पुलिस रेड की सूचना दे दी गई। जिसके बाद विकास ने करीबी 50 गुंडों को जमा कर, पुलिस के आते ही उनपर हमला कर दिया। जिसमें सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा सहित 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए।


सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के शव के साथ की गई बर्बरता
बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा लंबे समय से विकास दुबे के पीछे पड़े हुए थे और इस बात की जानकारी विकास दुबे को थी। इसी वजह से देवेंद्र मिश्रा को मारने के बाद विकास दुबे और उसके साथियों ने उनके शव के साथ बर्बरता की। अपनी खुन्नस को निकालते हुए विकास ने देवेंद्र मिश्रा के हाथों और पैरों की ऊंगली काट दी। साथ में सिर पर भी हमला किया। इतना ही नहीं खुन्नस में आकर विकास देवेंद्र मिश्रा के शव को आग भी लगाना चाहता था। विकास दुबे और थानेदारों की मिलीभगत के कारण ही देवेंद्र मिश्रा जैसे वफादार पुलिस वालों की जान चली गई और अभी तक ये आरोपी फरार है।

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