राजनीति

तो इस वजह से चीन की माला जपती है कांग्रेस, चीन के साथ किया था ‘गुप्त’ समझौता

भारत-चीन सीमा विवाद काफी समय से चला आ रहा है। बस फर्क इतना सा है कि जब देश में कांग्रेस की सरकार थी। तक चीन की और से की जानी वाली हरकतों पर भारत चुप रहता था और चीन को अपने से मजबूत देश मानता था।। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही चीन को लेकर भारत की नीति भी बदल गई हैं और अब भारत चीन की हर नापाक हरकत का मुंह तोड़ जवाब उसे दे रहा है। चीन लगातार भारत की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है और सीमा से लगे इलाकों पर अपना हक बता रहा है। चीन की और से की जा रही ही इन्हीं हरकतों पर अब भारत सरकार ने लगाम लगाना शुरू कर दिया है। जिससे की भारत में बैठी कांग्रेस पार्टी को मिर्ची लग रही है और कांग्रेस को चीन के प्रति भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पसंद नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों कांग्रेस पार्टी चीन के खिलाफ एक शब्द बोलने से बच रही है और गलवान घाटी की हिंसक झड़प में भारत सरकार का साथ देने की जगह, भारत सरकार से ही सवाल पर सवाल किए जा रही है।

कांग्रेस का ये रवैया समझने के लिए हमें अतीत में जाना होगा। क्योंकि अतीत में कांग्रेस और चीन के बीच किए गए समझौत ये साफ बताते हैं कि यूपीए की सरकार हमेशा से चीन के पक्ष में रही है। यूपीए सरकार ने हमेशा चीन की हरकतों को नजरअंदाज किया है। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के संबंध बेहद ही अच्छे बताए जाते हैं। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने तो कई बार चीन के साथ छुपकर बैठक भी की है।

7 अगस्त 2008 को सोनिया गांधी की अगुवाई में कांग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। इसी समझौते के कारण कांग्रेस आज भी चीन का साथ ही देती है। यूपीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के साथ उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने के लिए बीजिंग में एक समझौते किया था। इस समझौता के तहत दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर प्रदान किया था। यहां पर गौर करने की बात ये है कि ये समझौता ऐसे समय में कांग्रेस की और से किया गया, जब भारत में वामपंथी दलों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-1 सरकार में विश्वास की कमी व्यक्त की थी।

इस समझौता पर कांग्रेस के तत्कालीन मुख्य सचिव राहुल गांधी ने साइन किया था और उस समय सोनिया गांधी भी मौजूद थी। वहीं चीन की और से इस समझौते पर वहां के वर्तमान प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने हस्ताक्षर किया था। उस समय जिनपिंग पार्टी के उपाध्यक्ष थे। इस समझौता को करने से पहले राहुल और सोनिया गांधी ने आपसी हित के मुद्दों को लेकर शी जिंनपिंग के साथ बैठक की थी।

वहीं साल 2008 में सोनिया गांधी अपने पूरे परिवार के साथ यानी अपने बेटे राहुल, बेटी प्रियंका, दामाद रॉबर्ट वाड्रा और दोनों के बच्चों को लेकर ओलंपिक खेल देखने चीन गई थी। सोनिया और राहुल गांधी ने उस समय चीन में कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था।

दो बार की चीन के साथ गुप्त बैठकें

कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही चीन के साथ अपने संबंध अच्छे बनाने पर जोर देती है और इसके लिए चाहे इस पार्टी को देश के हितों के साथ ही समझौता क्यों ना करना पड़े। कहा जाता है कि कांग्रेस ने डोकलाम विवाद पर चीन के साथ गुप्त बैठकें की थी। ये मीटिंग साल 2017 में हुई थी। इस दौरान चीनी राजदूत लुओ झाओहुई के साथ ये बैठक की गई थी। आपको बात दें कि इस दौरान भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद छिड़ा था। वहीं जब इस बैठक की खबरें सामने आने लगी तो कांग्रेस ने इस बात से साफ इंकार कर दिया। लेकिन  चीन की एंबेसी की और से इस बैठक का खुलासा किया गया था।

कैलाश मानसरोवर मामले पर की दूसरी गुप्त बैठक

कैलाश मानसरोवर मामले पर भी चीन के नेताओं से कांग्रेस ने गुप्त बैठक की थी और इस बैठक का खुलासा खुद राहुल गांधी ने किया था। जिस समय ये बैठक हुई थी उस दौरान राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

अपने नेता को करवाया चुप

कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक बार LAC पर चीन की और से किए जा रहे विवाद को लेकर चीन के खिलाफ लोकसभा में भाषण दिया था। लेकिन कुछ समय बाद अधीर रंजन चौधरी को चुप करवा दिया गया। इतना ही नहीं अधीर रंजन चौधरी ने चीन के खिलाफ किए गए अपने एक ट्वीट को भी डिलीट कर दिया था।

कांग्रेस के बयान पर पेश की अपनी सफाई

अधीर रंजन चौधरी के बयान के चलते कांग्रेस ने अपनी सफाई भी पेश की। कांग्रेस पार्टी के राज्य सभा सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत और चीन के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मान्यता और महत्व देती है। दुनिया की दो प्राचीन सभ्यताओं और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, दोनों देशों को 21 वीं शताब्दी में एक महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए नियत किया गया है। चीन के बारे में कांग्रेस के लोकसभा नेता अधीर रंजन चौधरी के विचार उनके अपने हैं और पार्टी की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

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