अध्यात्म

भारतीय संस्कृति की ये पुरानी मान्यताएं अंधविश्वास नहीं है, जानें इनका वैज्ञानिक आधार!

भारतीय संस्कृति काफी प्राचीन संस्कृति है। प्राचीन समय में कुछ मान्यताएं थीं, जिन्हें उस समय के लोग मानते थे। लेकिन आज के तेजी से बढ़ते इस युग में लोग उन्हें मात्र अंधविश्वास मानते हैं। जबकि ऐसा नहीं है, हमारे पूर्वज इन्हीं मान्यताओं के आधार पर अपना जीवन जीते थे। आज के वैज्ञानिक भी उन पुरानी मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार ढूंढने में सफल हुए हैं। उनके अनुसार वो परम्पराएं विज्ञान की कसौटी को पूरा करती थीं। आइये जानते हैं वो कौन-कौन सी परम्पराएं हैं।

इन परम्पराओं का है वैज्ञानिक आधार:

*- दिशा शूल:

आज भी ऐसे लोग हैं जो दिशा शूल पर विश्वास करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे मात्र अंधविश्वास मानते हैं। दिशा शूल का मतलब होता है किसी विशेष दिन किसी विशेष दिशा की यात्रा नहीं करना। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगल-अलग दिन अलग-अलग दिशाओं में भू- चुम्बकत्व के कारण दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

*- नजर लगना:

आपने अक्सर देखा होगा कि जब बच्चों को नजर लग जाती है तो उन्हें किसी काली वस्तु से स्पर्श कराया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि काली चीजें किसी भी प्रकार के विकिरण को सोखने में सक्षम होती हैं। इस तरह से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे विकिरण को काले रंग की वस्तु अवशोषित कर लेती है।

*- दक्षिण दिशा में पैर करके नहीं सोना:

घर के बुजुर्ग हमेशा यह कहते हैं कि दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके नहीं सोना चाहिए, इससे व्यक्ति बीमार पड़ सकता है। उनका यह भी कहना होता है कि जब कोई मर जाता है तो उसके शव को ऐसे ही लिटाया जाता है। आप तो जानते ही हैं कि हमारे रक्त में लोहे की काफी मात्रा पायी जाती है। आप यह भी जानते होंगे कि उत्तरी ध्रुव का चुम्बकीय क्षेत्र काफी मजबूत होता है। अगर कोई व्यक्ति उत्तर दिशा की तरफ सिर या दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके सोता है तो उत्तरी दिशा का चुम्बकीय क्षेत्र उसके शरीर में मौजूद लोहे को उसके मस्तिष्क तक पहुंचा देता है। इससे व्यक्ति का दिमाग भी कमजोर हो जाता है।

*- कुएं में नीचे उतरने से पहले दिया जलाना:

आज भी गांवों में जब कोई कुएं में नीचे उतरता है तो सबसे पहले वह दिया जलाता है। आप सोच रहे होंगे कि वह कुएं की पूजा करता होगा। जी नहीं! वह कुएं की पूजा नहीं बल्कि कुएं में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा को देखता है। अगर कुएं में कार्बन डाईऑक्साइड की अधिकता होगी तो दिया बूझ जाएगा, ऐसी स्थिति में कुएं में उतरना हानिकारक हो सकता है।

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