दिलचस्प

कथा: लालच और प्रलोभन में फंसकर हम अपना ही नुकसान कर बैठते हैं और जिंदगी भर पछताना पड़ता है

एक राजा अपने लिए समझदार और ईमानदार मंत्री की तलाश कर रहा था। राज्य का हर व्यक्ति राजा का मंत्री बनना चाहता था। राजा ने कई लोगों का साक्षात्कार लिया लेकिन कोई भी व्यक्ति उन्हें मंत्री बनने के लायक नहीं लगा। जिसके कारण राजा काफी परेशान रहने लगा। वहीं जब राजा द्वारा मंत्री पद के लिए योग्य व्यक्ति की तलाश करने की बात राज्य के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को पता लगी तो वो फौरन राज महल चले गया। राजा से मिलकर इस व्यक्ति ने कहा, मैं इस गांव का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति हूं और मैं आपका मंत्री बनने के काबिल हूं। राजा ने इस व्यक्ति से काफी कठिन सवाल किए और इसने समझदारी से सवालों का जवाब दिया। इस व्यक्ति से राजा बेहद प्रसन्न हो गया और इसे मंत्री बनाने का विचार कर लेते है।

एक दिन ये व्यक्ति किसी काम से राजमहल से बाहर जा रहा होता है। रास्ते में इस व्यक्ति को एक बूढ़ा इंसान मिलता है जिसके पास तीन गठरी होती हैं। ये बूढ़ा इंसान मदद मांगते हुए कहता है, क्या तुम मेरी एक गठरी उठा सकते हो। ये काफी भारी है। ये व्यक्ति बुजुर्ग की मदद करने के लिए हां कर देता है और एक गठरी उठा लेता है। गठरी काफी भारी होती है। व्यक्ति बुजुर्ग से पूछता है कि आखिर इसमें क्या है जो ये इतनी भारी है। बुजुर्ग कहता है,  इस गठरी में सिक्के हैं।

आगे एक नदी आती है जिसे पार करना होता है। बुजुर्ग नदी को देख कहता है, क्या तुम मेरी दूसरी गठरी उठा सकते हो। क्योंकि दो गठरी लेकर में ये नदी पार नहीं कर सकता हूं। ये व्यक्ति दूसरी गठरी उठा लेता है और ये गठरी भी भारी होती है। बुजुर्ग व्यक्ति को कहता है,  इस गठरी में चांदी के सिक्के हैं जिसके कारण ये अधिक भारी है।

नदी पार करने के बाद एक पहाड़ आता है। बुजुर्ग पहाड़ को देखकर कहता है,  मैं गठरी के साथ ये पहाड़ नहीं चढ़ सकता हूं। क्या तुम मेरी तीसरी गठरी भी उठा सकते हो। व्यक्ति बिना कुछ बोले तीसरी गठरी भी उठा लेता है। बुजुर्ग पहाड़ चढ़ते हुए व्यक्ति से कहता है कि इस गठरी में सोने के सिक्के हैं तुम इसको लेकर मत भागना। मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर सकता हूं। व्यक्ति हंसते हुए कहता है, आप चिंता ना करें मेरे मन में लालच नहीं आएगा।

थोड़ी दूर जाने के बाद व्यक्ति सोचता है कि अगर ये तीनों गठरी लेकर मैं भाग जाऊं तो मैं धनवान बन जाऊंगा और ये बुजुर्ग तो मेरे को कभी पकड़ भी नहीं पाएगा। ये विचार आते ही ये व्यक्ति तेज चलने लग जाता है और बुजुर्ग की तीनों गठरी लेकर भाग जाता है। घर जाकर ये व्यक्ति जैसे ही तीनों गठरी खोलता है तो उसमें लोहे के सिक्ते होते हैं। ये व्यक्ति हैरान रहे जाता है। वहीं कुछ देर बाद इस व्यक्ति के घर बुजुर्ग आ जाता है और व्यक्ति से कहता है कि तुमने लालच में आकर मेरी तीनों गठरी चुरा ली। ये व्यक्ति गुस्से से आ जाता है और कहता है तुमने मेरे से झूठ बोला। इन गठरी में सोने और चांदी के सिक्के नहीं हैं। बुजुर्ग हंसने लग जाता है और अपने असली वेश में आ जाता है। ये बजुर्ग कोई और नहीं बल्कि राजा होता है। राजा को देख व्यक्ति हैरान हो जाता है। राजा इस व्यक्ति से कहता हैं तुम बुद्धिमान थे इसलिए मैेंने तु्म्हें अपना मंत्री नियुक्त करने का सोचा। लेकिन तुम्हारे अंदर ईमानदार बिलकुल नहीं है। इसलिए तुम मेरे मंत्री बनने के लायक नहीं हो। राजा की ये बात सुनकर व्यक्ति को अपनी गलती पर खूब पछतावा होता है।

प्रसंग की सीख

लालच में आकर हम अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। इसलिए हमेशा ईमानदार ही रहें।

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