आतंकवाद की फंडिंग पर चौतरफा घिरा पाकिस्तान, FATF का अल्टीमेटम कार्रवाई के लिए दिया तीन महीने का वक्त!

आतंकवाद की फैक्ट्री और आंतकियों के पनाहगाहर के रूप में विख्यात पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय मंचों में इस मुद्दे को लेकर भारी फजीहत हो रही है. आतंकवाद पर पाकिस्तान का रुख कभी साफ नहीं रहा है. लेकिन अब इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती है. एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, आतंकवाद की फंडिग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था द फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीफ) ने पाकिस्तान को एक नोटिस जारी किया है. नोटिस में पाकिस्तान को यह साबित करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है कि उसने जमात-उत-दावा और जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने वालों के रास्तों को रोकने का क्या काम किया है.

आतंकियों को लेकर पाक को 3 महीने का अल्टीमेटम :

पाकिस्तान के लिए यह चेतावनी निश्चित तौर पर मुश्किलें पैदा कर सकती है. बता दें कि इससे पहले अक्टूबर में हुई एफएटीएफ की बैठक के दौरान पाकिस्तान के उन दावों को खारिज कर दिया गया था जिसमें उसने कहा था कि उसने इन आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने पर कड़ी कार्रवाई की है. पिछले हफ्ते पेरिस में हुए एफएटीएफ के एक सम्मेलन में अधिकतर देशों का विचार था कि पाकिस्तान को मिलने वाली अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मदद पर रोक लगनी चाहिए. इस सम्मेलन में पाकिस्तान को 90 दिन का समय मांगने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा.

जनवरी के आखिरी हफ्ते में जमात-उत-दावा और जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए पाकिस्तान ने यह जताने की कोशिश की कि वह वाकई कार्रवाई को लेकर गंभीर है. इसी कार्रवाई का ही नतीजा है कि पिछले महीने 31 जनवरी को जमात-उत-दावा के सरगना हाफिज सईद को उसके घर में नजरबंद कर दिया गया था. FATF के इस कदम का पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कूटनीतिक विरोध भी जाहिर किया, लेकिन उसकी तमाम कोशिशों पर पानी फिर गया क्योंकि कई यूरोपीय देशों ने भी सबूतों के साथ बताया कि किस तरह इन आतंकवादी संगंठनों को पाकिस्तान में आर्थिक मदद मिल रही है.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ से जब हाफिज सईद के हाउस अरेस्ट को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘पिछले चार या पांच महीने से हमने ऐसे कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है जो आतंकवाद के प्रायोजक हो सकते हैं. उन पर नजर रखी जा रही है और उन्हें एक निश्चित इलाके से बाहर जाने की इजाजत नहीं है.’

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