बाहुबली अतीक अहमद पर सख्त हुआ हाई कोर्ट, कहा- रद्द कराएं सभी जमानत!

इलाहाबाद के सैम हिंगिनबाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नालॉजी एंड साइंस (शियाट्स) में धमकाने और मारपीट का मामला समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद और बाहुबली अतीक अहमद को भारी पड़ गया है. पूर्व सांसद अतीक अहमद पर दर्ज मुकदमों की फेहरिस्त देखने के बाद हाईकोर्ट का रुख उनके खिलाफ और सख्त हो गया है. कोर्ट ने पुलिस की लचर विवेचना को देखते हुए जांच एसपी क्राइम इलाहाबाद को सौंप दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अभियुक्त जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करता है तो यह उसकी जमानत को निरस्त करने का आधार होगा तो राज्य सरकार ने हत्या, अपहरण जैसे 45 गंभीर आपराधिक मामलों में लिप्त पूर्व सांसद अतीक अहमद की जमानत निरस्त करने की क्या कार्यवाही की है.

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अतीक की उन सभी मुकदमों में जमानत रद्द कराने की अर्जी दे, जिनमें वह जमानत पर हैं. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक व्यक्ति 1980 से लगातार अपराध पर अपराध किए जा रहा है और हर बार उसे जमानत मिल जाती है, जबकि जमानत की शर्त होती है कि यदि व्यक्ति दूसरे अपराध में शामिल होगा तो उसकी जमानत निरस्त कर दी जाएगी.

कोर्ट ने पूछा कि प्रदेश सरकार ने अतीक की जमानत रद्द कराने के लिए क्या कदम उठाए हैं. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निचली अदालत अतीक की जमानत मंजूर करे तो हमारे पास आए,हम रद करेंगे.
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने अतीक अहमद की क्राइम हिस्ट्री पेश करने का निर्देश दिया था. अपर महाधिवक्ता इमरानउल्लाह ने कोर्ट को अवगत कराया कि अतीक पर कुल करीब 83 मुकदमे हैं जिनमें से 43 गंभीर किस्म के अपराध हैं. इनमें वह जमानत पर जेल से बाहर हैं. जनप्रतिनिधियों के आपराधिक मामले शीघ्र निपटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राज्य सरकार ने क्या कार्यवाही की है. कोर्ट ने सरकार द्वारा की गयी कार्यवाही की जानकारी के साथ एसएसपी इलाहाबाद से हलफनामा मांगा है. याचिका की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी.

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