पहले फेज में सबने मुस्लिम वोटरों पर खेला दांव तो अब बीजेपी हिंदुओं को कर रही है एकजुट!

उत्तर प्रदेश की अगली विधानसभा के लिए फैसले की घड़ी का पहला चरण आ गया है. शनिवार यानी 11 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों की 73 सीटों पर वोटर फैसले का बटन दबाएंगे. पहले चरण में कई समीकरण काम कर रहे हैं और सभी राजनीतिक दलों की कोशिश इन सभी समीकरणों को साधने की रहेगी. चुनाव से पहले नेताओं ने एक दूसरे पर वार और पलटवार किए हैं. पश्चिमी यूपी का चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि यहां छब्बीस फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, यही वजह है कि चुनाव से पहले हिंदू-मुस्लिम का नारा खूब सुना गया.

पश्चिमी यूपी में चुनाव से पहले हर पार्टी ने वोट के लिए पूरा दम लगाया. धर्म, जाति, विकास का हर कार्ड खेला गया अब इन वादों, नारों के शोर के बीच जनता के फैसले की घड़ी आ गई है. शनिवार को पश्चिमी यूपी की 73 सीटों पर वोट डाले जाने हैं.

क्या है सियासी समींकरण :

बड़ी बात ये है कि इन 73 सीटों पर छब्बीस फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. मेरठ और उसके आसपास के इलाकों में मुस्लिम आबादी 35 से 45 प्रतिशत तक है. इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी यूपी की कुल 140 विधानसभा सीटों पर बीएसपी ने 50 उम्मीदवार उतारे हैं. सपा-कांग्रेस गठबंधन भी 42 मुस्लिम उम्मीदवारों के साथ यहां के चुनावी मैदान में है.

मुस्लिम वोट अहम क्यों :

खास बात ये है कि पश्चिमी यूपी की 140 में से 26 सीटें ऐसी हैं, जहां सपा और बीएसपी दोनों की तरफ से ही मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है. साफ है कि पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट अहम हैं और इसे पाने के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन और मायावती के बीच होड़ मची हुई है.

हिंदुओं को एकजुट करने में जुटी बीजेपी :

जहां विरोधी पार्टियां मुस्लिम कार्ड खेल रही हैं तो बीजेपी को हिंदू कार्ड पर भरोसा है. बुधवार को राजनाथ सिंह ग्रेटर नोएडा में दादरी के उस गांव में गए थे जहां गोहत्या के आरोप में अखलाक की हत्या कर दी गई थी. कुल मिलाकर अब गेंद जनता के पाले में है. फिलहाल पहले फेज में सभी पार्टियां मुस्लिम वोटरों को लुभाने में लगी हैं तो बीजेपी हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास कर रही है.

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