हर चुनावी मंच पर मुसलमानों को अपना वोट ‘बर्बाद’ न करने कीसलाह देने वाली बीएसपी प्रमुख मायावती को अब राष्ट्रीय उलमाकाउंसिल का भी साथ मिल गया है. राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के समर्थनका ऐलान किया है. बीएसपी के समर्थन के ऐलान के बादकाउंसिल की तरफ से 84 विधानसभा सीटों पर तय किए गएउम्मीदवारों के नाम वापस ले लिए हैं.

राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने बुधवार को बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकीकी मौजूदगी में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीएसपी को समर्थन देनेका ऐलान किया. मौलाना आमिर रश्दी ने कहा, ‘काउंसिल ने 84 सीटों के लिए प्रत्याशी तय किए थे लेकिन अब उनमें से कोई भीचुनाव नहीं लड़ेगा. हम पूरी तरह से बीएसपी का समर्थन करेंगे.’ रशादी ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए जरूरीहै कि मुस्लिमों का वोट न बंटे. इसलिए मायावती से मुलाकात केबाद हमने समर्थन का फैसला किया है. गुंडाराज व दंगाराज सेप्रदेश को बीएसपी ही बचा सकती है. मायावती के बीजेपी केसाथ गठबंधन के सपा के आरोपों पर कहा कि मायावती नेसपोर्ट लिया था. ‘रास्ते में अगर गाड़ी पंचर हो जाए तो सपोर्टलेना कोई बुरी बात नहीं है.’

सपा पर जमकर बरसे मौलाना :

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रश्दी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने 5 साल के कार्यकाल में मुसलमानों को सिर्फ ठगने का कामकिया है. अखिलेश सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा किपहले तो हुकूमत में दंगाइयों को छूट दी और अब कांग्रेस कीबैसाखी पकड़ ली. मौलाना के साथ मौजूद बसपा महासचिवनसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि बसपा सरकार बनने पर इनमामलों की जांच कराई जाएगी. तीन तलाक के मामले परमौलाना व बसपा महासचिव ने एक सुर में कहा कि धार्मिकमामलों में दखल की इजाजत किसी को नहीं होनी चाहिए.

भाजपा द्वारा किसी मुसलमान को टिकट न दिए जाने परनसीमुद्दीन ने कहा कि अब मुसलमान अपनी काबिलियत उन्हेंबता देंगे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ सीट सेसपा के नेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने वालेमौलाना रशादी की पार्टी का पूर्वांचल के कुछ जिलों में प्रभावमाना जाता है.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

error: Content is protected !!