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भारत के हर मुसलमान की राष्ट्रीयता हिन्दू है: मोहन भागवत!

यूपी चुनाव आते ही एक बार फिर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान दिया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर कहा है कि भारत में जन्मा हर व्यक्ति हिंदू है. देश की एकता के लिए विविधता को अच्छा बताते हुए मध्य प्रदेश के बैतूल में सर संघचालक ने हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए बुधवार को कहा कि मुसलमानों की इबादत का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन उनकी राष्ट्रीयता हिन्दू है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी को प्रथम चरण के लिए वोट डाले जाएंगे, उससे पहले बैतूल हिन्दू सम्मेलन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है. हिंदू धर्म के बारे में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हमारे धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं.

सम्मेलन में पहुंचने से पहले बैतूल जेल पहुंचकर संघ प्रमुख ने आरएसएस के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए. गोलवलकर को महात्मा गांधी की हत्या के बाद 1949 में इस जेल में बंद किया गया था. हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में जेल मैन्युअल का उल्लंघन किया है.

भागवत ने संबोधन में कहा कि जैसे इंग्लैड में इंग्लिश लोग रहते हैं, अमेरिका में अमेरिकी लोग और जर्मनी में जर्मन लोग रहते हैं, ठीक उसी तरह हिंदुस्तान में हिंदू रहते हैं. हिंदुस्तान के लोग भारत माता को अपनी मां मानकर उसकी भक्ति करते हैं. राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा भारत माता की आरती करने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू हैं इसलिए वह तो भारत माता की आरती करेगा ही, क्योंकि इबादत से वे मुसलमान हो गए, मगर राष्ट्रीयता से तो हिंदू ही हैं.

तीन संकल्प भी दिलवाए :

भागवत ने बैतूल में आयोजित इस विशाल हिन्दू सम्मेलन में लोगों से तीन संकल्प लेने की अपील की है. उन्होंने लोगों से कहा कि वे संकल्प लें कि हम सब एक हैं और एक दूसरे के साथ भेद का आचरण नहीं करेंगे. इनके साथ ही भागवत ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और देश का गौरव बढ़ाने वाले कामों को करने का संकल्प लेने को कहा.

अंग्रेजों ने टूटा आइना पकड़ा दिया :

भागवत ने कहा कि अंग्रेजों ने हमें टूटा आइना पकड़ा दिया है. उसे देखकर हम आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हैं. उस टूटे आइने को फेंक दो और हमारा नया आइना है कि हम एक हैं.

‘भारत माता की जय” दिल की भाषा है :

भागवत ने कहा कि ‘भारत माता की जय” दिल की भाषा है. इसलिए पूरे देश में कोई भी भाषा बोलने वाला हो, वह भारत माता की जय इन्हीं शब्दों में बोलता है.

भागवत ने हिंदू सम्मेलन में मौजूद लोगों को भारत की विविधता को ही एकता का प्रतीक बताया. साथ ही सभी से जात-पात, भाषा, धर्म से ऊपर उठकर देश के लिए एकजुट होने का आह्वान किया.

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