बॉलीवुड

‘ओवरड्रेस वुमेन’ पर पोस्ट लिख कर ट्रोल हुए सब्यासाची, अब मांगी लोगों से माफी

बॉलीवुड के जाने-माने डिजाइनर सब्यासाची मुखर्जी अपने बेहतरीन डिजाइनर आउटफिट्स के लिए जाने जाते हैं। सब्यासाची के डिजाइन किए हुए कपड़े बॉलीवुड से लेकर के उघोग जगत तक के लोग पहनते हैं। उन्होंने अपने बेहतरीन डिजाइन्स से बॉलीवुड की ना जानें कितनी एक्ट्रेसेस को सजाया है। सिर्फ बॉलीवुड स्टार्स ही नहीं बल्कि देश की बड़ी नामचीन हस्तियां भी सब्यासाची के डिजाइन किए हुए कपड़े पहनती हैं। बता दें कि सब्यासाची इन दिनों खबरों में बने हुए हैं। लेकिन इस बार उनके खबरों में रहने की वजह उनका कोई आउटफिट नहीं बल्कि उनका एक ऐसा पोस्ट है जिसकी वजह से वो सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं।

दरअसल सब्यसाची ने सोशल मीडिया में ‘ओवरड्रेस वुमेन’ पर एक आर्टिकल लिखा था। उनका ये आर्टिकल कई लोगों को पसंद नहीं आया और लोगों ने उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। बात को बढ़ता देखकर सब्यासाची ने अब अपने पोस्ट के लिए लोगों ने माफी मांग ली है।

सब्यसाची ने अपने इंस्ट्राग्राम में पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा था, ‘अगर आप किसी वुमेन को ओवरड्रेस, हैवी मेकअप, आभूषणों से सुसज्जित देखते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे वो जख्मी हो। अंदर खून बह रहा है। कष्ट में है। ऐसी महिलाएं दुनिया के लिए चमकती हैं लेकिन वास्तव में अंदर से दर्द में। उसे उपचार की आवश्यकता है और कुछ नहीं। उसे अपना स्पेशल टाइम देने के लिए कुछ समय निकालें, उसे अपनी सहानुभूति के साथ ठीक करें, क्योंकि इंसान के प्यार और नर्मी की कोई जगह नहीं ले सकता। कीमती आभूषण भी नहीं।’

 

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बता दें कि सब्यासाची के इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा- ओवरड्रेस वर्ड मिसोजनी से भरा हुआ है. आपको ये पोस्ट डिलीट कर देनी चाहिए. आपके ज्यादातर कस्टमर वुमेन है. ये ठीक नहीं है. बता दें कि सब्यसाची सेलिब्रिटी डिजाइनर हैं. उनका कलेक्शन काफी रिच और एक्सपेंसिव होता है. दीपिका पादुकोण से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक सभी ने अफनी शादी के जोड़े उन्हीं से डिजाइन कराए थे.

महिलाओं के फैशन और उनके ड्रेसिंग सेंस को लेकर किया गया ये पोस्ट लोगों को पसंद नहीं आया और लोगों ने उनको ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगों ने उनसे सवाल किया कि आखिर उनका ये अकाउंट कौन चला रहा है। जिसके बाद सब्यासाची ने एक पोस्ट लिखते हुए अपने पोस्ट को लेकर के माफी मांगी।

सब्यसाची ने लिखा, ‘फैशन इंड्रस्टी में 20 सालों से हूं। मैंने अपने कई साक्षात्कारों में इसके बारे में टिप्पणी की है कि कैसे, जबकि कई महिलाएं आनंद और आत्म-अभिव्यक्ति के लिए फैशन और सौंदर्य का उपयोग करती हैं, अन्य इसे अपने जीवन में अंतराल और व्यर्थता को भरने के लिए ‘रिटेल थेरेपी’ के रूप में उपयोग करती हैं। हम, एक समाज के रूप में, अक्सर लोगों के कपड़ों की पसंद के बारे में जबरन राय बना लेते हैं, उन्हें ‘अति’, ‘अनुचित’ या ‘ओवरड्रेस’ कहते हैं। हम यह समझने में नाकाम हैं कि हो सकता है कि कुछ लोग सपोर्ट सिस्टम की कमी को पूरा करने के लिए इनका उपयोग कर रहे हों।’

 

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I thought a lot about whether to post this, but sometimes it is important to set the record straight and get the right message across. Having been in the fashion industry for over 20 years, I have encountered it firsthand and commented about it in many of my interviews – how, while many women use fashion and beauty for joy and self-expression, others use it as ‘retail therapy’ to fill in the gaps and voids in their lives. We, as a society, often get extremely judgemental about peoples’ clothing choices, calling them ‘overdressed’ or ‘tacky’ or ‘inappropriate’. We fail to understand that maybe some are using these as coping mechanisms to put on a brave front to make up for the lack of a support system. The true essence of the post was to ask people to be aware, empathetic, and not judgemental of peoples’ personal clothing choices, which could be a manifestation of their internal anguish. One of the bigger issues in society today, that very few people address, is mental health, and a little bit of awareness, empathy and kindness go a long way in acknowledging it. I have coped with crippling depression as a teenager for 7 years. I found my coping mechanism through radical clothing choices.I was sneered at and bullied, but it helped me find my way again. When I was creating this jewellery collection, I referred to Tagore’s ‘Monihara’ because it talks about these issues, which are sadly more relevant today. And I, for one, have never shied away from speaking about uncomfortable truths, no matter how disruptive it might be for my personal gain. Because when power is given, social responsibility should not be shunned. The mistake, however, was to use the reference as a blanket statement, as sometimes when we are passionate about an issue, we end up becoming overzealous and hence, tone deaf. My sincere apologies for that. The original post (however flawed) was put up to invite introspection and debate about how love, sensitivity and compassion, alongside expressions of art, beauty and fashion can create a net positive in the world. I invite everyone to democratically join this debate. Regards, Sabyasachi

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