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तेनालीराम की कहानी: फलों के बदले तेनालीराम ने चुकाई ‘कुछ नहीं’ की कीमत

राजा कृष्ण देवराय का एक मंत्री अपने राघव नामक मित्र को तेनालीराम की होशियारी के बारे में बताता है और अपने मित्र से कहता है, तेनालीराम बेहद ही बुद्धिमान है और उस जैसा बुद्धिमान व्यक्ति मैंने नहीं देखा है। तेनालीराम के पास हर समस्या से निकलने का हल होता है और इसी वजह से तेनालीराम राजा कृष्ण देव राय के करीबी लोगों में से एक है। तेनालीराम की होशियारी के बारे में सुनकर राघव को तेनालीराम से जलन होने लग जाती है। जिसके बाद राघव मंत्री से कहता है, तेनालीराम मेरे से अधिक बुद्धिमान नहीं हो सकता है और ये बात में साबित करके दिखाऊंगा। कुछ दिनों बाद राघव तेनालीराम के गांव में फल विक्रेता बनकर जाता है और तेनालीराम को फल खरीदने के लिए बुलाता है।

तेनालीराम राघव से फलों का दाम पूछते हैं। राघव तेनालीराम की तारीफ करते हुए कहता है, मैं आप जैसे बुद्धिमान इंसान से कैसे पैसे ले सकता हूं, इन फलों की कीमत ‘कुछ नहीं’ है। राघव की ये बात सुनकर तेनालीराम बिना उसे पैसे दिए फल ले लेते हैं और अपने घर जाने लगते हैं। तभी राघव शोर मचाने लग जाता है और लोगों से कहता, तेनालीराम ने मेरे फल चुरा लिए हैं और इनके पैसे नहीं दे रहा है। तेनालीराम राघव की ये बात सुनकर हैरान हो जाते हैं और राघव से कहते हैं, तुमने ही तो कहा था कि तुम्हारे फलों के दाम ‘कुछ नहीं’ हैं। तो अब क्यों मेरे से पैसे मांग रहे हो। राघव तेनालीराम से कहता है, मैंने कहा तो था कि मेरे फलों के दाम ‘ कुछ नहीं’ है। तो मुझे ‘कुछ नहीं’ दे दो, नहीं तो मैं तुम्हारी शिकायत राजा कृष्ण देव राय से कर दूंगा। तेनालीराम काफी गहरी सोच में पड़ जाते हैं और कुछ देर बाद राघव से कहते हैं, ठीक है तुम कल मुझे राजा कृष्ण देव राय के दरबार में मिलो।

सुबह होते ही राघव राजा कृष्ण देव राय के दरबार में जाता है और उन्हें पूरी बात बताता है। राघव राजा कृष्ण देव राय से कहता है, महाराज या तो आप मुझे कुछ नहीं दिलवा दो या फिर तेनालीराम को कठोर सजा दो। राघव का दोस्त भी दरबार में मौजूद होता है और ये सब देखकर वो समझ जाता है कि राघव ने तेनालीराम के खिलाफ कोई जाल बिछाया है। वहीं राजा कृष्ण देव राय तेनालीराम को दरबार में बुलाते हैं और तेनालीराम को राघव के फलों का दाम चुकाने को कहते हैं।

तेनालीराम दरबार में अपने साथ एक बेहद ही सुंदर गहनों का डब्बा लाते हैं। इस डब्बे को देखकर राघव को लगता है कि इसके अंदर गहने होंगे और तेनालीराम सजा से बचने के लिए मुझे ये गहने फलों के दाम के रूप में देने वाले हैं। तभी तेनालीराम राघव को डब्बा पकड़ा देते हैं और राघव खुश होकर डब्बे को खोलता है। लेकिन डब्बा एकदम खाली होता है और खाली डब्बे को देखकर राघव तेनालीराम से कहता है, ये क्या इसमें तो ‘कुछ नहीं’ है।

तब तेनालीराम बोलते हैं, “तुम अपना ‘कुछ नहीं’ इस डब्बे से निकाल लो।” तेनालीराम  की ये बात सुनकर राघव अपने ही जाल में फंस जाता है और शर्मिंदा होकर अपने घर वापस चले जाता है। वहीं दरबार में मौजूद हर व्यक्ति तेनालीराम की चतुराई को देख, उनकी तारीफ करने लग जाते हैं।

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