800 साल पुराने इस अनोखे मंदिर में होती है मुस्लिम महिला की पूजा, विदेशी भी आते हैं दर्शन करने   गुजरात में स्थित यह मंदिर अपने आप में ख़ास है. इस मंदिर के पीछे एक हैरान कर देने वाली कहानी छुपी है.

पूरे भारतवर्ष में न जाने कितने ही मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है. किसी भी मंदिर के पीछे कोई ना कोई कहानी अवश्य छुपी होती है, जिसके बारे में ज़्यादातर लोगों को खबर भी रहती है. पर अब भी भारत में कुछ मंदिर ऐसे हैं जो रहस्यों से भरे पड़े हैं. वहां पर होने वाले चमत्कार को देखकर लोग आज भी हैरान हो जाते हैं. हिंदू-मुस्लिम वाले इस देश में आये दिन किसी न किसी मुद्दे पर बहस होती रहती है. हर रोज़ कोई ना कोई ऐसा मुद्दा उठ ही जाता है जो दोनों धर्मों के बीच जंग छेड़ देता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत देश में एक गांव ऐसा भी है जो हिंदू-मुस्लिम से परे है. इस गांव में एक ऐसा मंदिर है जिसमें किसी हिंदू देवी-देवता की नहीं बल्कि एक मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है. जी हां, आपने सही सुना! इस गांव के लोग मुस्लिम महिला को पूजते हैं.

कहां है यह मंदिर?

यह मंदिर अहमदाबाद शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर ‘झुलासन’ नाम के एक गांव में स्थित है. मंदिर में स्थापित इस मुस्लिम महिला की प्रतिमा को लोग ‘डोला माता’ के नाम से बुलाते हैं. हम आपको बता दें कि इस मंदिर में ‘डोला माता’ की कोई भी तस्वीर या मूर्ति नहीं है. मंदिर में सिर्फ एक पत्थर का यंत्र मौजूद है जिसे लोग ‘डोला माता’ कहते हैं और उसी पर साड़ी डालकर पूजा करते हैं.

क्या है मान्यता

गांव वालों की मानें तो एक मान्यता के अनुसार करीब 250 साल पहले एक मुस्लिम महिला ने अपने गांव को उपद्रवियों से बचाने के लिए जमकर लड़ाई की थी. लड़ाई के दौरान और गांव की रक्षा करते-करते वह मृत्यु को प्राप्त हो गई थी. इसी जांबाज़ महिला का नाम ‘डोला’ था. लोगों की मानें तो उस महिला की मृत्यु के बाद उसका शरीर फूलों में तब्दील हो गया था. इस चमत्कार को लोगों ने अपनी आंखों के सामने होते हुए देखा जिसके बाद गांव वालों ने महिला के नाम पर मंदिर की स्थापना कर दी. इस मंदिर का नाम रखा गया ‘डोला माता’ का मंदिर. यहां के लोगों की इस मंदिर में असीम आस्था है. सिर्फ वहां के नहीं बल्कि दूर-दूर से भी लोग इस मंदिर को देखने आते हैं. आप जानकर हैरान होंगे कि 7000 की आबादी वाले इस गांव में 1500 लोग अमेरिका के नागरिक हैं.

सुनीता विलियम्स से जुड़ा है गांव

बता दें, अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पंड्या इसी गांव से रिश्ता रखते हैं. 22 साल की उम्र तक वह झुलासन गांव में ही रहे थे. इसके बाद वह अमेरिका चले गए. कहा जाता है कि अंतरिक्ष में जाने से पहले सुनीता विलयम्स अपने पिता के साथ डोला माता के दर्शन करने आई थीं और उनका आशीर्वाद लिया था. पंडित के पुजारी दिनेश पंड्या ने बताया कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद भी सुनीता डोला माता के दर्शन करने आई थीं.

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