शादी के पहले आपका ब्लड टेस्ट कराना चाहती हैं सरकार, जाने क्यों जल्द शादी के पहले खून की जांच कराना होगा अनिवार्य

जब भी शादी की बात होती है तो कई सारी चीजों का ध्यान रखा जाता हैं. आखिर ये लड़का और लड़की के जीवनभर का मामला होता हैं. इसलिए कई लोग शादी के पहले कुंडली मिलान करवाते हैं. इससे लड़का और लड़की के बीच की कॉम्पेबिलिटी चेक की जाती हैं. हालाँकि कुंडली मिलाना एक व्यक्तिगत चॉइस होती हैं. हर कोई इसे नहीं मिलाता हैं. हर व्यक्ति अपनी सोच के हिसाब से अलग लग मापडंडो के आधार पर शादी तय करता हैं. लेकिन आने वाले समय में शादी करने के पहले एक ख़ास चीज का मिलान करना कानूनी रूप से जरूरी हो सकता हैं. दरअसल CNBC-आवाज़ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार सरकार जल्द ही ऐसा नियम बना सकती हैं जिसमे लड़का लड़की को शादी के पहले अपना ब्लड टेस्ट (खून की जांच) कराना अनिवार्य होगा. यह नियम फिलहाल ड्राफ्ट नोट के रूप में मौजूद हैं जिसे जल्द ही लागू किया जा सकता हैं.

शादी के पहले क्यों करना होगा ब्लड टेस्ट?

अब आप में से कई लोग सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी क्या आफत आन पड़ी जो सरकार शादी के पहले खून की जांच कराने का नियम बना रही हैं. दरअसल ये नियम ना सिर्फ आपके लिए फायदेमंद होगा बल्कि आपके भविष्य और होने वाले बच्चे की नियति भी तय करेगा. बात ये हैं कि इस नियम के जरिए सरकार आपकी थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी खून की बीमारियों की जांच करना चाहती हैं. इस नई पॉलिसी लागू होने सरकार को थैलेसीमिया संबंधी बीमारियों के मरीज कम करने में मदद मिलेगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जब माता पिता इस बिमारी से ग्रसित होते हैं तो उनके बच्चों को भी ये बिमारी होने के चांस अधिक रहते हैं. यही वजह हैं कि सरकार शादी के पहले कपल्स की थैलेसीमिया जांच कराने का नियम लाना चाहती हैं. इसके अलावा स्कूल में बच्चों और अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच का नियम भी आ सकता हैं.इसके साथ ही थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के रिश्तेदारों की भी जांच होगी.

क्या हैं थैलेसीमिया की बिमारी?

थैलेसीमिया एक खून संबंधित बिमारी होती हैं जो जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से होती हैं. अर्थात ये आपके परिवार के जींस से आपको मिलती हैं. इस बिमारी से पीड़ित लोगो का खून बार बार बदलने की जरूरत पड़ती हैं. चुकी भारत में अधिकतर एक ही समुदाय के लोगो में शादियाँ होती हैं इस वजह से इस बिमारी के फैलने के चांस भी बढ़ने लगते हैं. हेमेटोलॉजिस्ट नीता राधाकृष्णन के अनुसार पंजाबी और सिंधी समुदाय में इसके मामले सबसे अधिक देखने को मिलते हैं. मराष्ट्र से लेकर ओडिशा तक कई लोग इससे पीड़ित हैं. एक अनुमान के तौर पर हर 100 में से 5 लोग थैलेसीमिया, सिकल सेल से प्रभावित होते हैं.

बस यही ये ख़ास वजह हैं जिसके कारण सरकार इस तरह का नियम लागू करना चाहती हैं.ये आम जनता के हित का नियम होगा. इससे हम इस बिमारी से भविष्य में पैदा होने वाले मरीजों पर रोकथाम लगा सकते हैं. इसलिए यदि ये नियाम आगे चलकर लागू होता हैं तो हर किसी को इसका पालन करना चाहिए. बल्कि हमारी सलाह तो यही होगी कि आप इस नियम के लागू होने का इंतज़ार ना करे. यदि आप शादी करने जा रहे हैं तो इस तरह के टेस्ट सेफ्टी के लिहाज से पहले ही करवा ले.