दिलचस्प

एक मां और नेवले की नैतिक कहानी, जो देती है हमें बेवजह किसी पर भी शक ना करने की सीख

एक ब्राह्मण के यहां पर एक पुत्र का जन्म होता है। ब्राह्मण की पत्नी रामवती अपने पुत्र को बेहद ही प्यार करती हैं। रामवती के साथ ही उसके घर में रहने वाली एक नकुली भी नेवले को जन्म देती है। रामवती अपने बेटे के साथ साथ नेवले का भी खूब ध्यान रखती है। नेवला अक्सर रामवती के बेटे के साथ खेला करता था और इन दोनों को एक साथ खेलता देख रामवती को काफी अच्छा लगता था। लेकिन जैसे ही नेवला थोड़ा बड़ा हो गया, रामवती के मन में ये शक पैदा हो गया की कहीं ये नेवला उसके पुत्र को काट ना दे। इस शक के चलते रामवती ने नेवले पर नजर रखनी शुरू कर दी।

एक दिन रामवती के पति की तबीयत खराब हो जाती है जिसके चलते पति की जगह रामवती को कुएं से पानी भरने के लिए जाना पड़ता है। कुएं पर जाने से पहले रामवती अपने पति से कहती है कि वो बच्चे और नेवले पर नजर रखें और इस बात का ध्यान रखें की नेवला बच्चे को काट ना लें। रामवती की बात सुन उसका पति उससे कहता है, ये तुम क्या बोल रही हो। नेवला हमारे पुत्र से बेहद ही प्यार करता है और वो कभी भी हमारे बेटे को नहीं काटेगा। तुम अपने दिमाग से नेवल के प्रति ये शक निकाल दो। अपने पति की बात सुनने के बाद रामवती को गुस्सा आ जाता है और वो अपने पति से कहती है ‘जो मैंने तुम्हे कहा है तुम वो ही करो और जब तक मैं पानी भरकर नहीं आती हूं तो अपनी नजर नेवले पर रखना’।

रामवती के जाने के बाद उसका बच्चा आंगन में नेवले के साथ खेलने लग जाता है और रामवती का पति इन दोनों पर नजर रखता है। लेकिन तभी रामवती के पति को नींद आ जाती है और वो सो जाता है। इसी बीच एक सांप बच्चे के पास आकर उसे काटने की कोशिश करता है। लेकिन नेवला उस सांप को मार देता है और नेवले के मुंह पर सांप का खून लग जाता है। थोड़ी देर बाद रामवती अपने घर पानी का मटका लेकर आती है और जैसे ही वो नेवले के मुंह में खून लगा देखती है, उसे लगता है कि नेवले ने उसके पुत्र का मार दिया है। रामवती अपने इस शक के कारण नेवल पर पानी का मटका फेंक देती है और नेवला मर जाता है।

रामवती भागते हुए अपने बेटे के पास जाती है और उसे वहां पर मरा हुआ सांप नजर आता है। मरे हुए सांप को देखकर रामवती समझ जाता है कि नेवले ने उसके बेटे की रक्षा सांप से की थी और उसके मुंह पर लगा खून सांप का था। नेवले को मरा हुआ देख रामवती रोने लगती है। तभी रामवती का पति वहां पर आता और रामवती अपने पति को पूरी बात बताती है। रामवती की बात सुनकर उसका पति उसे कहता है कि मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि नेवले के प्रति जो तुमने अपने मन में शक पाल रखा है उसे निकाल दो। लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मानी और तुम्हारे इसी शक के कारण आज नेवले की जान चले गई।

कहानी से मिली सीख

कई बार हम लोग भी किसी शक के कारण कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसकी वजह से हम औरों को नुकसान पहुंचा देते हैं। इसलिए आप कभी भी अपने मन में बेवजह का कोई भी शक ना पाले।

Back to top button