अष्टमी और नवमी की तिथि को लेकर है असमंजस की स्थिति तो जरूर पढ़ें ये खबर जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से माता की अराधना करता है व कन्यापूजन करता है माता हमेशा ही उनपर अपनी कृपा बनाई रखती हैं

हिंदु धर्म में नवरात्र का कितना ज्यादा महत्व है ये तो आप सभी को पता ही होगा, वहीं ये भी बात सच है कि साल में दो नवरात्र पड़ता है एक चैत्र नवरात्र तो वहीं दूसरा शारदीय नवरात्र। ये बात तो आपको पता ही होगा कि अभी चैत्र नवरात्र का समय चल रहा है और ऐसे में हर भक्त माता को प्रसन्न करने की भरसक प्रयास भी करता है। बताते चलें कि शारदीय नवरात्र की तरह चैत्र नवरात्र में भी अष्टमी व नवमी के दिन हवन व कन्याभोज किया जाता है लेकिन इस बार भी लोगों के मन में अष्टमी और नवमी की तिथि के कारण, लोग काफी कन्फ्यूज हो गए है और इस वजह से उनको हवन व कन्यापूजन को लेकर भी असमंजस बना हुआ है, ऐसे में हम आपकी सहायता कर सकते हैं।

जी हां, आपको बता दें की ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार बताया  जा रहा है की यह नवरात्र इस बार 8 दिनों के हैं, इसलिए उन्होने बताया है कि चैत्र नवरात्र अष्टमी शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ हो रही है। यह शनिवार को 11 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। मां सिद्धिदात्री का पूजन नवमीं शनिवार को 11 बजकर 41 मिनट से किया जा सकेगा। हालांकि उदयातिथि के अनुसार अष्टमी शनिवार को और नवमीं रविवार मानी जाएगी। ज्योतिष विशेषज्ञ के अनुसार तिथि आरंभ से अष्टमी पूजा और कन्या पूजन करना शुभ होगा और ऐसे में कुछ साधक ऐसे भी हैं जो किन्हीं कारणों से अष्टमी को आज मनाना चाहते हैं वो दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से अष्टमी पूजा और यज्ञादि कर सकते हैं और इसके बाद सर्वार्थसिद्धि योग सप्तमी पूजन के दौरान माता कालरात्रि की महानिशा पूजा की जाती है। जिसके बाद से शुक्रवार प्रातः 9 बजकर 53 मिनट से सर्वार्थसिद्धि योग भी प्रारंभ हो रहा है।

इसमें मां के पूजन की शुभता और बढ़ जाती है, आपको बताते चलें कि ज्योतिषियों की गणना के अनुसार सप्तना दोपहर 1 बजकर 23 मिनट तक ही था और उदयातिथि के प्रभाव में यह अहोरात्र बनी रहेगी। महागौरी पूजा दुर्गाष्टमी शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी जो शनिवार को 11 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। अब अगर बात करते हैं नवमी तिथि की तो गणना के अनुसार तो शनिवार को प्रातः 11 बजकर 41 मिनट से आरंभ होगी। यह रविवार को प्रातः 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। साधकगण शनिवार और रविवार को नवमीं पूजा और यज्ञ अनुष्ठान कर सकते हैं। उदयातिथि को मानने अनुसार नवमीं पूजनकाल रविवार को अहोरात्र बना रहेगा।

ये जानकारी हम आपको इसलिए दे रहे हैं क्योंकि हर कोई ये जानता है कि नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजन का बड़ा ही महत्व है। यह अष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल देकर नौ दिनों तक लगातार चलने वाले व्रत व पूजन महोत्सव के सम्पन्न होने के संकेत देती है। अष्टमी और नवमीं वाले दिन कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। उन्हें तोहफे और लाल चुनरी उड़ाना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से माता की अराधना करता है व कन्यापूजन करता है माता हमेशा ही उनपर अपनी कृपा बनाई रखती हैं।