जब 13 साल की उम्र में मां बन गई श्रीदेवी, जाने बॉलीवुड के गलियांरों के ऐसे ही कुछ अनसुने किस्से

दुनिया में जब सिनेमा आया होगा तो लोगों के लिए ये एक रोमांचक बात रही होगी, लेकिन इस सिनेमा में जादू कुछ ऐसा है कि आज भी हम इससे बेहद ही लगाव रखते हैं। भारतीय सिनेमा ने 100 साल से ज्यादा का समय बीता लिया है और इन 100 सालों में एक से एक नायाब सितारे हमें दिए। अपनी किस्मत चमकाने कितने ही लोग इस इंड्स्ट्री मे आते हैं। कुछ सफल हो जाते हैं, कुछ असफल और कुछ दिग्गज बन जाते हैं। आपको आज इंडस्ट्री से अपना नाम रोशन करने वाले कुछ सितारों के बारे में ऐसे दिलचस्प किस्से बताएंगे जिनसे आप अनजान होंगे।

राज कपूर

बॉलीवुड के लेजेंड एक्टर और डॉयरेक्टर राज कपूर ने दौलत और शोहरत दोनों ही खूब कमाई, लेकिन बहुत कम लोग ये बात जानते होंगे की राज कपूर बहुत ही अंधविश्वासी थे। फिल्मी दुनिया में काम करने वालों को बहुत ही खुले विचार वाला और तथ्यों पर बात करने वाला माना जाता है, लेकिन राज कपूर कुछ अनोखी बातों में .यकीन करते थे। कहा जाता है कि जब सत्यम शिव सुंदरम फिल्म रिलीज हो रही थी तो राजकपूर ने मांस-मंदिरा दोनों ही छोड़ दिया था ताकी फिल्म हिट हो सके।

श्रीदेवी

दिग्गज अभिनेत्री और बॉलीवुड की चांदनी आज भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन अपनी अनोखी अदायगी ने उन्होंने लंबे समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया। श्रीदेवी वो पहली अभिनेत्री थी जिन्होंने पर्दे पर 13 साल की उम्र में एक मां की भूमिका निभाई थी। फिल्म मुंदरु मुडिचू में श्रीदेवी ने रजनीकांत की सौतेली मां का रोल निभाया था।

मुगल-ए-आजम

एक ऐसी फिल्म जिसे बनने में 18 साल लग गए औऱ बनाने वाले निर्देशक को लोग पागल तक कहते थे। इस फिल्म ने एक ऐसी प्रेम कहानी लोगों को दी जिसे ना कोई जनता ना कोई सेलिब्रिटी कभी भूला पाएगा। इस फिल्म की शूटिंग हो रही थी तो हर एक सीन को तीन भाषाओं मे शूट किया गया था। ये फिल्म हिंदी तामील औऱ इंग्लिश मे शूट हुई थी।

कहो ना प्यार है

ऋतिक और अमीषा की डेब्यू म्यूजिकल ब्लॉकबस्टर फिल्म को कौन भूल सकता है। फिल्म के गाने जबरदस्त हिट थे। इस फिल्म की सबसे खास बात ये थी की ये अब तक की एकलौती ऐसी फिल्म थी जिसे एक साथ 92 अवॉर्ड्स मिली थी ये फिल्म 14 जनवरी 2000 को रिलीज किया गया था और फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई थी।

लगान

आमिर खान की फिल्म लगान को कौन भूल सकता है। इस फिल्म ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस फिल्म को अंग्रेज और भारतीयों के बीच की लड़ाई एक क्रिकेट मैच के रुप में दिखाया गया था। इस फिल्म में ब्रिटिश एक्टर्स ने भूमिका निभाई थी। ये भी अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड है कि आज तक ऐसी फिल्म नहीं बनी जिसमें एक साथ इतने ब्रिटिश एक्टर्स को एक साथ कास्ट किया गया।

देवआनंद

काले सूट में देवाआनंद जब पर्दे पर आते थे तो भीड़ उनक लिए पागल हो जाती थी। लड़कियां ऐसी दीवानी थीं की उन्हें देखकर अपने होश खो बैठती थीं। आपको पता नहीं होगा लेकिन जो उनकी फिल्में दर्शकों को पसंद आती थी उसमें से कितनी ही फिल्मों के नाम न्यूजपेपर के हेडलाइन से लिए जाते थे। देवआनंद अपनी फिल्मों के नाम इसलिए ऐसे रखते थे जिससे वो दर्शकों से जुड़ाव महसूस कर सके।

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