नई दिल्ली – माता सीता एक आदर्श स्त्री का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। माता सीता को एक अच्छी पुत्री, आदर्श पत्नी, उच्च चरित्र वाली महिला माना जाता है, लेकिन तुलसीदास द्वारा रचित ‘श्री रामचरित मानस’ और वाल्मीकि द्वारा वाल्मीकि रचित ‘रामायण’ में माता सीता के बारे में कुछ असमानताएं देखने को मिलती हैं। इनके अलावा कुछ अन्य ग्रन्थ भी हैं पर इन सब में वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को सबसे सटीक और प्रामाणिक माना जाता है। आज इस लेख में हम आपको माता सीता के बारे में कुछ बहुत ही रोचक और अनसुनी बातें बताएंगे जो बहुत कम लोग जानते होंगे। Facts about sita.

 Facts about sita

मां सीता के बारे में कुछ खास बातें…….
सीता स्वयंवर 

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माता सीता स्वयंवर के दौरान महाराज जनक घोषणा करते हैं कि जो वीर भगवान शिव के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उससे वह पुत्री सीता का विवाह कर देंगे। स्वयंवर में कई क्षत्रिय राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाते हैं। ऐसे में जनक उलाहना देते हैं कि क्या कोई वीर नहीं जो इस धरती पर शिव धनुष को हिला भी सके। ऐसे में विश्वामित्र की आज्ञा पर भगवान राम शिव धनुष को भंग कर देते हैं। रामचरित मानस में सीता स्वयंवर का उल्लेख लेकिन वाल्मीकि रामायण में नहीं।

सीता का हरण  

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आज तक हम लोग सुनते चले आ रहे है कि माता सीता का हरण रावण कर ले गया था। पुराणों के अनुसार माना जाता है कि रावण को श्राप मिला था कि अगर वो किसी स्त्री को अपने महल या फिर उस स्त्री के बिना अनुमति छुएगा, तो वो वही पर भस्म हो जाएगा। इस बात पर कितनी सच्चाई थी। इसमें क्या रहस्य है। इस रहस्य को महर्षि वाल्मीकि की रचित रामायण व गोस्वामी तुलसी की रचित रामचरित मानस में इस बात को स्पष्ट रूप से बताया गया है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण ने सीता का हरण अपने रथ से किया था। रावण का यह दिव्य रथ सोने का बना था।

सीता पूर्व जन्म में वेदवती थीं 

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एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था, तभी उसे एक सुंदर स्त्री दिखाई दी, उसका नाम वेदवती था। वह भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। रावण ने उसके बाल पकड़े और अपने साथ चलने को कहा। उस तपस्विनी ने रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी, इतना कहकर वह अग्नि में समा गई। उसी स्त्री ने दूसरे जन्म में सीता के रूप में जन्म लिया। ये प्रसंग वाल्मीकि रामायण का है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण ने सीता का हरण अपने रथ से किया था। रावण का यह दिव्य रथ सोने का बना था,इसमें गधे जूते थे और वह गधों के समान ही शब्द (आवाज) करता था।

श्रीराम व सीता का विवाह 

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मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को श्रीराम व सीता का विवाह हुआ था। हर साल इस तिथि पर श्रीराम-सीता के विवाह के उपलक्ष्य में विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह प्रसंग श्रीरामचरित मानस में मिलता है। तुलसीदास ने लिखा है कि मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को सीता और राम की शादी हुई थी लेकिन रामायण में ऐसा नहीं वर्णन नहीं है।

सीता को नहीं लगती थी भूख-प्यास 

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सीता हरण की रात भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता के लिए खीर लेकर आए, पहले देवराज ने अशोक वाटिका में उपस्थित सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया। उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की, जिसके खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई। यह सब कुछ तुलसी दास ने नहीं लिखा है।  ये प्रसंग वाल्मीकि रामायण में मिलता है।

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