विशेष

लड़कियों को फंसाया, रेडियो रिपेयरिंग के बाद बेचे जूते और अचानक कांडा बन बैठा एयरलाइन्स का मालिक

एयर होस्टेस गीतिका सुसाइड केस में गोपाल कांडा को रोहिणी कोर्ट ने कोर्ट में पेश होने का समन जारी किया है. बता दें, गोपाल कांडा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं. कोर्ट ने गोपाल कांडा को आदेश दिया है कि वह 15 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर हों. गीतिका सुसाइड केस में गोपाल कांडा के अलावा केस की सह आरोपी अरुणा चड्ढा को भी पेश होने के लिए कोर्ट ने आदेश दिए हैं.

कुछ ऐसी है गोपाल कांडा की कहानी

गोपाल कांडा ने फर्श से अर्श तक का सफ़र तय किया. गोपाल कांडा ने 90 के दशक में हरियाणा के एक छोटे से शहर सिरसा से शुरुआत की थी. उस समय वह यहां रेडियो की एक छोटी सी रिपेयरिंग की दुकान चलाया करते थे. इस दुकान से वह मुश्किल से 100 रुपये प्रतिदिन कमा पाते थे. लेकिन उसके सपने कुछ और थे. वह जनता था कि ये काम करके वह अपनी मंजिल हासिल नहीं कर पायेगा. इसलिए कुछ टाइम बाद ही उसने ये काम बंद कर दिया और एक नए धंधे की शुरुआत की. इस बार उसने भाई के साथ मिलकर जूते और चप्पलों की दुकान खोली. धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ा और दोनों भाईयों ने मिलकर खुद जूता-चप्पलों की फैक्ट्री खोल ली. जूते बेचते-बेचते कांडा बड़े-बड़े बिजनेसमैन, नेताओं, बिल्डर और दलाल के पैरों को नापने लगा.

राजनीति को बनाना चाहता था कारोबार

राजनीतिक तलवों को नापने की शुरुआत उसने बंसीलाल के बेटे से की. अब उसका रसूख भी बढ़ने लगा था लेकिन सरकार गिरते ही सब फिर से ढीला पड़ गया. उसने फिर ओमप्रकाश चौटाला के बेटों के पांव नापने शुरू किये. सर पर सियासी हाथ आने से धीरे-धीरे जूते के वजन भी बढ़ते गए. लेकिन अब उसके दिमाग में राजनीति को कारोबार बनाने की प्लानिंग चल रही थी.

ऐसे खुला कांडा की किस्मत का ताला

इसी दौरान सिरसा में एक आईएस अफसर आया जिसकी झोली भरकर वह अपना व्यापार बढ़ाने लगा. इसी बीच अफसर का ट्रांसफर गुड़गांव हो गया. गुड़गांव का हुलिया बदलने की जिम्मेदारी आईएस अफसर को मिल गयी थी. गुड़गांव की जमीन सोना हो गयी थी. जमीन वालों की चांदी हो गयी थी. अफसर हरियाणा डेवलपमेंट अर्बन ऑथिरिटी यानी हुडा गुड़गांव का सबसे बड़ा जमींदार बन गया था. कांडा के करीबी आईएस अफसर के हाथ में पूरे गुड़गांव की जिम्मेदारी थी. अब इसके साथ ही गोपाल कांडा की किस्मत भी खुलने वाली थी. अफसर की मदद से वह भी अपना सिक्का चमकाने वाला था.

जमीन की दलाली ने बनाया पैसेवाला

लिहाजा उसने स्कूटर उठाया और सीधे सिरसा से गुड़गांव पहुंच गया. अब दलाली उसका पेशा बन चुका था. जमीन सोना उगल रही थी और वह सोना निगल रहा था. वक्त बीतने लगा और साल 2007 में एक खबर आई जिसे सुनकर सिरसा के लोग चौंक गए. गोपाल कांडा ने पिता के नाम की खुद की एयरलाइन्स कंपनी शुरू कर दी थी. लेकिन उसकी एयरलाइन्स जैसे-तैसे 2 साल चलने के बाद ठप पड़ गयी.

ऐसे बना हरियाणा का गृहराज्य मंत्री

जमीन पर आने के बाद कांडा ने होटल, कैसिनो, प्रॉपर्टी जैसे कामों में हाथ आजमाया और यहां से खूब कमाया. लेकिन उसकी नजरें सिरसा की राजनीति पर ही टिकी थी. वोट में नोट इन्वेस्ट करते-करते उसने राजनीति में हाथ आजमाया और जीत भी गया. नसीब देखिये कि 90 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस को केवल 40 सीट ही मिली. निर्दयी विधायकों ने अपनी बोली लगाई और उसी में कांडा हरियाणा का गृहराज्य मंत्री बन गया. मंत्री बनते ही वह सिरसा का शेर बन चुका था. पुलिस भी अब उसे सलाम ठोकती थी. लेकिन पैसा और पॉवर के साथ उसके पास गंदगी भी आई. उसने अपनी कंपनी में अब छोटी उम्र की लड़कियों की भर्ती शुरू की. छोटी उम्र में लड़कियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी. उन्हीं में से एक लड़की थी गीतिका.

तरक्की की सीढ़ियां चढ़ती गयी गीतिका

गीतिका की मुलाकात कांडा से एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी. वह एयरहोस्टेस और केबिन क्रू के सिलसिले में कांडा से मिली थी. इंटरव्यू खत्म होते ही कांडा ने उसे ट्रेनी केबिन क्रू का लेटर थमा दिया. 18 साल की होते ही गीतिका एयरहोस्टेस बन गयी. इसके बाद गोपाल कांडा का साथ मिलते ही गीतिका तरक्की की सीढियां चढ़ने लगी.

सुसाइड नोट से खुली कांडा की पोल

कांडा की मेहरबानी से गीतिका तीन साल के अंदर ही ट्रेनी से कंपनी की डायरेक्टर बन गयी. लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ कि गीतिका ने कांडा और उसकी एयरलाइन्स दोनों से दूरी बना ली. वह दुबई में जाकर नौकरी करने लगी. लेकिन कांडा ने उसे दिल्ली आने पर मजबूर कर दिया और उसका पीछा नहीं छोड़ा. वह अब घुट-घुट कर रहने लगी थी. कांडा उसे हर तरीके से टॉर्चर करता था. वहां जहां भी जाती उसके पीछे लोग छोड़ देता और उसके परिवार को भी परेशान करता. आखिरकार एक दिन तंग आकर गीतिका ने सुसाइड कर लिया और नोट में कांडा का नाम लिखकर गयी.

लड़कियों पर मेहरबान रहता था कांडा

इस घटना के बाद कांडा कुछ टाइम तक पुलिस से भागता रहा. लेकिन कुछ टाइम तक पुलिस से आंख-मिचोली करने के बाद मजबूरन उसे सरेंडर करना ही पड़ा. बता दें, उसकी दिलचस्पी लड़कियों में ज्यादा थी. वह हमेशा लड़कियों को आगे रखता था और उन्हें ऊंचा ओहदा देता था. गीतिका शर्मा, अरुणा चड्ढा, नुपुर मेहता और अंकिता चंद नाम हैं जो उसकी कंपनी में उंचे पोस्ट पर कार्यरत थी. वह लड़कियों को कम उम्र में बड़ी सैलरी और पैकेज दिया करता था. उसने कुल 48 कंपनियां खोल रखी थी जिसमें अधिकतर लड़कियां ही काम करती थीं. कांडा लड़कियों का बहुत शौक़ीन था. उसकी कंपनी में एक से बढ़कर एक खूबसूरत लड़कियां काम करती थीं.

कैसिनो डांसर का था अहम किरदार

कांडा कांड में अंकिता नाम की एक लड़की ने अहम किरदार निभाया था. अंकिता पेशे से एक डांसर थी और मध्य प्रदेश के सतना की रहने वाली थी. वह पहली बार कांडा से साल 2005 में मिली थी. गीतिका ने उसे पहली बार कांडा के गुड़गांव स्थित फार्महाउस पर देखा था. उसका परफॉरमेंस देखने के बाद कांडा ने उसे अपने गोवा स्थित कैसिनो में नौकरी दे दी. अंकिता कांडा के बच्चे की मां भी बनी. कांडा के अपने ही कंपनी में काम करने वाली कई महिलाओं के साथ संबंध थे.

पढ़ें पत्नी से संबंध बनाने के बाद जीवनभर इस बात को लेकर परेशान रहे गांधीजी, खुद को नहीं कर सके माफ

दोस्तों, उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा. पसंद आने पर लाइक और शेयर करना न भूलें.

Back to top button