कभी अमीर हुआ करते थे ये देश, आज चरमराई अर्थव्यवस्था के चलते गरीब देशों में होती है गिनती ताकतवर और रईस हुआ करते थे देश, लेकिन आज हो चुके हैं गरीब

किसी भी देश की आर्थिक स्थिति से पता चलता है कि वो देश गरीब है या अमीर या फिर वो कितनी प्रगति कर रहा है। दुनिया में ऐसे बहुत से मुल्क रहे हैं जो पहले बहुत अमीर हुआ करते थे, लेकिन अब गरीब हो चुके हैं। हर देश के आर्थिक भविष्य को बनाने में सदियों की मेहनत लगती है, लेकिन बहुत कम ही समय में स्थिति को बिगड़ने में वक्त लगता है। आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही देशों के बारे में जो पहले तो अमीर थे, लेकिन अब गरीब हो चुके हैं।

माली

माली को दुनिया के गरीब देशों में से एक कहा जाता है। यूनाइटेड नेशंस की सूची में माली का स्थान बहुत नीचे आता है। पेट पालने के लिए लोग यहां खेती करते हैं, लेकिन इससे भी बहुत मुश्किल से उनका गुजारा हो पाता है। हालांकि 100 साल पहले यहां की स्थिति ऐसी नहीं थीं। यहां एक बड़ा साम्राज्य हुआ करता था। मूसा के समय इस सम्राज्य ने अच्छा वक्त देखा। 1312 से 1317 तक इस शासन का हिस्सा रहा। मूसा 1 दुनिया के अमीर लोगों में से एक माना जाता था। माली को सोने का मुख्य निर्माता कहा जाता था। ये अपना कारोबार मिस्त्र, जेनेवा और वेनिस से भी करता था। 16वीं शताब्दी तर ये काफी संपन्न औऱ भरा पूरा साम्राज्य था, लेकिन धीरे धीरे इसकी स्थिति कमजोर होती चली गई। आज ये एक गरीब देश ही रह गया है।

टर्की

टर्की को पूरी तरह से गरीब देश तो नहीं कह सकते, लेकिन इसकी जीडीपी कई यूरोपियन देशों से कम है। 16वीं शताब्दी के आस पास इस साम्राज्य की आय पश्चिमी यूरोप से काफी अधिक थी। एनाटोलिया और दक्षिणी पश्चिमी य़ूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे देश इसी में थे। उस वक्त साम्राज्य में सुल्तान सुलेमान की हुकूमत हुआ करती थी। इनका शासन 1520 से 1566 तक था। उस वक्त सैन्य ताकत, धन दौलत और कला काफी बढ़ चुकी थी। इसके बाद ओटामन साम्राज्य को 1700 में यूरोप ने अपने कब्जे में ले लिया। ओटामन ने 19वीं शताब्दी में अर्थव्यवस्था को समृद्ध किया।पहले विश्व युद्ध में इस देश ने जर्मीन का साथ दिया और ओटोमन साम्राज्य 1922 में एक बार फिर अस्तित्व में आया और रिपबल्कि ऑफ टर्की बन गया।

लातीविया

लातीवि. 1918 मे आजाद हुआ और 1922 में इसका संविधान बना। 1920 और 1930 के दौर में ये देश अपने पड़ोसियों फिनलैंड और डेनमार्क से भी ज्यादा अमीर हुआ करता था। इसकी अर्थव्यवस्था भी काफी मजबूत हो गई थी। कृषि और टिंबर ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी। ये ऐसा देश था जहां दूध , मक्खन औऱ मीट का जबरदस्त इस्तेमाल होता था।  इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लातीविया को नाजी ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया।1990 में दोबारा आजादी हासिल करने वाला लातीविया यूरोपियन यूनियन का हिस्सा बन गया।

क्यूबा

1959 में फिडेल कास्ट्रो के क्यूबा की आजादी के आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद अमेरिका में इस की जीडीपी सबसे अधिक हो गई। उस वक्त इस देश में लोगों के पास सबसे अधिक कार और टेलीफोन हुआ करते थे। हालांकि अमीर अमेरिकी क्यूबा में जुए का अड्डा बना लिया औऱ यहां की बढ़ती अर्थव्यवस्था धीरे धीरे कम होने लगी। सैन्य शासन ने संगठित अपराध , ड्रग और वैश्यावृत्ति भी बढ़ गई। इसके बाद से क्यूबा की जीडीपी में गजब की गिरावट आई। 1990 में ये काफी में  निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि जीडीपी में गिरावट के बाद भी स्वास्थ्य और शिक्षा की दुनिया भर में तारीफ होती है।

इराक

तेल और गेस भंडारों की प्रचुरता के लिए जाने जाना वाले देश इराक 1960 और 1970 में एक विकसित देश था। इराक ने एक लंबे .समय तक बेहतर जीवन स्तर को जिया। इसकी जीडीपी 1950 में काफी बढ़िया थी। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसका काफी बेहतरीन हुआ करता था। इसके बूरे दिन जब शुरु जब सद्दाम हुसैन इराक मे आया।इसके इराक के पड़ोसी देश से 8 साल तक युद्ध अर्थव्यस्था को काफी चोट पहुंचाई। कुछ दशकों बाद इसकी जीडीपी काफी नीचे गिर गई। इराक इरान में से 2003 से 2011 तक जंग लड़ता रहा इसके बाद इसकी अर्थव्यवस्था में कुछ बदलाव आया।

जिम्बांबे

एक जमाने अफ्रीका का ब्रेड बास्केट जिम्बांबे था। 1980 में प्रचुर प्राकृतिक स्त्रोत और कृषि क्षेत्र की वजह से जिम्बांबे काफी बेहतर स्थिति में था, लेकिन 1990 के बाद देश की हालत बिगड़ने लगी। साल 2000 में राष्ट्रपति मुगाबे ने देश के फॉर्म को जब्त करना शुरु कर दिया। इसके बाद 1990 के बाद देश की हालत बिगड़ने लगी। रॉबर्ट मुगाबे के जाने के बाद राष्ट्रपति इमर्सन मांगवा ने चीन से निवेश को बढ़ाया जिसने अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत दी, लेकिन आने वाले समय में इस देश को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

नाऊरु

1970 में ये देश पैसे से भरा पूरा था। उर्वर्क विस्फोट के कारण ये काफी अमीर भी हो गया था, इसकी जीडीपी भी दुनिया में काफी मजबूत थी। एक समय ऐसा था जब यहां सभी तरह की सुविधाएं मौजूद थीं।बाद में फॉस्फेट के भंडार धीरे धीरे खाली होते गए। पैसे के कुप्रबंधन ने नाउरु की हालत बिगाड़ दी। देश कर्ज में डूब गया।  2000 में टेलीकॉम और बैकिंग सिस्टम खराब हो गया। ऐसे में नाउरू पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हो गया था। जीडीपी धीरे धीरे गिरने लगी और गरीबी बढ़ने लगी। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की सरकार भी यहां पर अपना इमीग्रेशन  सेंटर बंद करने के बारे में सोच रही है जो आय का एक बहुत बड़ा स्त्रोत माना जाता है।

वेनेजुएला

एक समय में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था काफी अच्छी मानी जाती थी, लेकिन दिन ब दिन इसकी स्थिति कमजोर होने लगी। बीते साल इसकी अर्थव्यवस्था 2013 की तुलना में 35 फिसदी कम हो गई। जबकि एक समय ऐसा था की इसकी इकोनॉमी का बोलबाला था। पूरी तरह से तेल पर निर्भर इस देश में 2014 में कोमोडटी के दामों में गिरावट के बाद मुश्किल बढ़ गई। बाहर से आर्थिक मदद ना मिलने के कारण यहां की स्थिति काफी बिगड़ने लगी जिसकी वजह से खाने की कमी, मेडिसिन, और अन्य दूसरे सामानों में काफी मुश्किल होने लगी।

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